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चंपावत-लोहाघाट की बिजली व्यवस्था 18 माह में संवरेगी

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चंपावत। चंपावत और लोहाघाट की बिजली व्यवस्था अगले 18 माह में कई खामियों से मुक्त हो जाएगी। गड़बड़ियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 9.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। एकीकृत पावर विकास स्कीम (आईपीडीएस) के अंतर्गत शुरू इस योजना के तहत सर्वे का काम शुरू हो गया है। इस योजना के पूरा होने से जिले के दो शहरों की बिजली आपूर्ति में गुणात्मक सुधार होगा। साथ ही बिजली से जुड़ी दुर्घटनाएं भी कम होंगी।
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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड की परियोजना खंड हल्द्वानी के अधिशासी अभियंता डीएस बिष्ट ने बताया कि आईपीडीएस के तहत चंपावत और लोहाघाट नगर क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के काम कराए जाएंगे। इसके लिए इस साल जून में काम कराने वाली निजी कंपनी (एसआरवी टेक्नो इंजीनियरिंग कंपनी दिल्ली) से अनुबंध हो चुका है। इसके लिए कुल 9.62 करोड़ (चंपावत नगर क्षेत्र में 5.91 करोड़ और लोहाघाट के लिए 3.71 करोड़) रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कंपनी को 18 महीने के भीतर ये काम पूरा कराना होगा।
यूपीसीएल के चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। अब कंपनी काम में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को एकत्र करा रही है। बताया गया कि लाइनों में फॉल्ट के साथ ही बिजली की चोरी भी कम होगी। सुरक्षा के उपाय बढ़ने से हादसों के खतरे भी कम होंगे। इस वक्त डिवीजन में करीब 29 प्रतिशत लाइन लॉस (बिजली आपूर्ति एवं राजस्व का अंतर) है। इसमें खासी गिरावट आएगी। कई जगह बिजली पोल एवं ट्रांसफार्मर खतरनाक हाल में हैं। इन सबसे भी मुक्ति मिलेगी।
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एकीकृत पावर विकास स्कीम के तहत चंपावत और लोहाघाट में काम होगा
केंद्र सरकार ने 9.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, कंपनी ने पूरा किया सर्वे


ये काम होंगे
-एलटी और 11 केवी की लाइन के खुली लाइनों को एक गुच्छे में डाला जाएगा।
- बिजलीघर की कमी को दूर किया जाएगा।
- 41.9 किलोमीटर एलटी लाइन को सुधारा जाएगा।
- 36.5 किलोमीटर 11 केवी लाइन को नया और अपग्रेड किया जाएगा।
- 25, 63, 100 और 250 केवी के 17 ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे।
- 1150 परिवारों के मीटरों को खंभे में लगाया जाएगा।
- 800 खराब मीटरों की मरम्मत होगी।
- 65 ट्रांसफार्मरों में मीटर लगाए जाएंगे।
- बिजली के खराब पोलों को भी बदला जाएगा।

ये लाभ होंगे
- बिजली आपूर्ति में गुणात्मक सुधार।
- लाइन लॉस में कमी आएगी।
- करंट और बिजली संबंधित दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
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