चंपावत। जिला कार्यालय सभागार में प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाला जनसमस्या निवारण शिविर महज औपचारिकता बन कर रह गया है। सोमवार को भी जनसमस्या निवारण शिविर में जिला स्तरीय अधिकारी फरियादियों का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई भी फरियादी निर्धारित समय सीमा में समस्या दर्ज कराने नहीं पहुंचा। इस वर्ष जनवरी के पहले सोमवार से शुरू किए जनसमस्या निवारण शिविर में दो माह के भीतर महज आठ समस्याएं दर्ज कराई गईं, जबकि समाधान केवल दो ही समस्या का हो सका है।
ऐसे शिविर में जनवरी में तीन समस्याएं दर्ज की गई थी। इनमें सिलिंटाक के पाहुन सिंह ने बीपीएल में नाम दर्ज कराने, जाख जिंडी की आशा देवी ने ग्राम पंचायत में सरकारी धन को मनमाने तरीके से खपाने, बड़ेत के महेश गहतोड़ी ने मनरेगा से ऐड़ी मंदिर निर्माण का भुगतान की समस्या दर्ज कराई थी। इनमें से पाहुन सिंह, आशा देवी की समस्या का निस्तारण कर दिया गया है। फरवरी में पांच समस्याएं दर्ज की गई। जिनमें चंपावत के देवीदत्त भट्ट ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति की राशि का भुगतान करने, प्रहलाद सिंह ने भैरवां में नाली निर्माण करने, मुडियानी के ग्रामीणों ने जबर्दस्ती भूमि काटने, नीड़ के ग्रामीणों ने तल्ली नीड़ नैनी-बालेश्वर सड़क को देउरा से बनाने की मांग उठाई थी।
विभिन्न मंचों और माध्यमों से प्राप्त होती हैं समस्याएं
चंपावत। डीएम डॉ. अहमद इकबाल का कहना है कि जिले में आयोजित किए जाने वाले तहसील दिवसों, बीडीसी बैठकों समेत विभिन्न मंचों, माध्यमों से लोगों की समस्याएं मिलती हैं। यदि जनसमस्या निवारण शिविर में लोग कम आ रहे हैं तो इसका आशय किसी अन्य माध्यम से उन्होंने अपनी समस्या को प्रशासन तक पहुंचा दिया होगा।