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मां भगवती ने मधु और कैटभ राक्षसों का संहार किया

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मां भगवती ने मधु और कैटभ राक्षसों का संहार किया
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चंपावत। उत्तर मुखी गंडकी नदी के किनारे धर्मशिला में श्रीमददेवी भागवत कथा जारी है। कथा के चौथे दिन मां भगवती द्वारा मधु और कैटभ राक्षसों के संहार के प्रसंग का वर्णन किया। कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
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कथा वाचक व्यास गौरव पांडेय ने कहा कि जब भगवान विष्णु योग निद्रा में थे। इसी दौरान उनके कर्ण मैल से मधु और कैटभ नामक दो राक्षसों की उत्पत्ति हुई। दोनों ही राक्षसों ने पृथ्वी लोक में उत्पात मचाया। ये राक्षस ऋषि मुनियों के साथ ही देवताओं को सताने लगे। परेशान देवगण ब्रह्मा जी की शरण में पहुंचे। भगवान ब्रह्मा दोनों राक्षसों के संहार के लिए योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु की के पास गए। लेकिन भगवान विष्णु नींद से नहीं जागे। तब ब्रह्मा समेत सभी देवी देवताओं ने मां भगवती की तपस्या की। इसके बाद मां भगवती ने अवतरित होकर मधु और कैटभ का संहार किया। धर्मशिला के महंत बाबा इंद्रायण दास के नेतृत्व में चल रही भागवत कथा में पंडित हरीश पांडेय ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।
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