चंपावत। लोहाघाट रोडवेज डिपो बसों की कमी से जूझ रहा है। डिपो के बेड़े में कुल 34 बसें हैं। इसमें से 20 बसें पुराने मॉडल की हैं। यह बसें सड़क पर चलते-चलते खराब होती रहती हैं। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लोहाघाट रोडवेज डिपो के पास 10 बसें 2016 मॉडल की हैं। जबकि 10 बसें 2019 मॉडल की हैं। 14 बसें नई हैं, जिनका संचालन लंबी दूरी के लिए किया जा रहा है। वहीं डिपो की छह बसें ऐसी हैं कि जो आए दिन रास्ते में हांफ जाती हैं। इस समस्या के चलते डिपो ने छह बसों का संचालन टनकपुर से करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद डिपो में मात्र 28 बसें रह जाएंगी। इससे बरेली, हल्द्वानी और नैनीताल के रूट लोहाघाट से कट जाएंगे। डिपो के एजीएम धीरज वर्मा ने बताया कि डिपो में वर्तमान में 34 बसें हैं। 11 बसें पर्वतीय क्षेत्र में सात लाख चलने के मानक पूरे कर चुकी हैं। इसके अलावा करीब नौ बसों के मानक कुछ समय बाद पूरे हो जाएंगे। बताया कि नई 12 बसों का संचालन दिल्ली और दो बसों का संचालन देहरादून रूट पर किया जा रहा है। जबकि अन्य बसों को अन्य रूटों पर संचालित किया जाता है।