फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

2 महीनों में बनने हैं 831 शौचालय

Sat, 13 Feb 2016 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
विज्ञापन
विज्ञापन
मौजूदा वित्त वर्ष 2015-16 में चंपावत जिले में 2031 शौचालय बनाए जाने हैं, मगर अब तक बने हैं सिर्फ 1200 शौचालय। बचे दो महीनों में विभाग को 831 शौचालय और बनाने हैं। मतलब यह कि प्रति माह औसतन 415 शौचालयों का निर्माण करना है।
विज्ञापन


जिले में मार्च 2015 तक 49,209 परिवारों में से अब तक 35,676 में शौचालय बने हैं। अक्तूबर 2014 से शुरू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के बाद शौचालय निर्माण की गति में भी तेजी आई। पिछले वित्त वर्ष में चंपावत जिले में 4000 शौचालयों के लक्ष्य के सापेक्ष 4044 शौचालय बने। बचे 13533 शौचालयों का निर्माण 2019 तक करने का लक्ष्य है। स्वजल विभाग के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में 2031 शौचालयों का लक्ष्य है, मगर जनवरी तक 1200 ही तैयार किए जा सके हैं। यानि कि अब औसतन हर दिन 14 शौचालय बनाए जाने हैं।

स्वजल के अधिकारियों के मुताबिक जिले में सभी शौचालयों का निर्माण 31 मार्च 2019 तक बना लिए जाएंगे। स्वजल के परियोजना प्रबंधक (पीएम) एमके गर्ग का कहना है कि 130 ग्राम पंचायतों को मौजूदा वित्त वर्ष में शौचालययुक्त बना लिया जाएगा, जबकि 2016-17 तक 74, 2017-18 तक 65 और 2018-19 तक बचे 11 ग्राम पंचायतों को फीड कर लिया जाएगा।
विज्ञापन


निरुपयोगी हैं 4643 शौचालय
चंपावत जिले में 49209 परिवारों में से अब तक 35676 में शौचालय बने हैं, लेकिन अधिकांश में ताला लटका है। विभागीय आंकड़ों में ही करीब 4643 शौचालय बनने के बाद अब उपयोग में नहीं आ रहे हैं। गांवों से दूसरी जगह शिफ्ट होना, पानी की कमी और टूटने के बाद दोबारा नहीं बनाया जाना इसकी वजह है।

बिन पानी भी चल रहे कई शौचालय
शौचालयों के बनने की गति में तेजी तो आई, लेकिन कई जगह पहले से बने सार्वजनिक शौचालयों की हालत खराब है। यहां शांत बाजार के 2008 में सार्वजनिक शौचालय के बेहद बुरे हाल में है। साफ-सफाई का बुरा आलम है। यात्री और दूसरे लोग दुर्गंध के बीच इन शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। पानी का कनेक्शन कटा है। मांडेक्स हैंडपंप के सहारे पानी की कमी दूर की जा रही है। इस सुलभ शौचालय में तो सफाई के लिए पानी तक नहीं है। पानी का कनेक्शन पांच साल पूर्व कट चुका है। शौचालय कर्मी अर्जुन का कहना है कि पानी की व्यवस्था शौचालय के पास के मांडेक्स हैंडपंप से हो रही है। इस वजह से न केवल सफाई प्रभावित हो रही है बल्कि पानी भरने में भी भारी परेशानी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें