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समाजसेवा या सियासत की सीढ़ी

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चंपावत। तीन मई को नगर निकायों का कार्यकाल पूरा हो गया है और शुक्रवार से निकायों की कमान अध्यक्ष के बजाय प्रशासकों के हाथ आ जाएगी। नए निकाय चुनावों की तैयारियां चल रही है। कई राजनीतिक दल और संभावित प्रत्याशियों की उधेड़बुन जोरों पर हैं। इन चुनावों के लिए अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोटी रकम खर्च करते हैं, मगर इतनी रकम खर्च करने के बावजूद अध्यक्ष को मानदेय के रूप में एक भी रुपया नहीं मिलता है, जबकि उन्हें चुनाव जीतने के बाद कई तरह की राजनीतिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इसके बावजूद बगैर किसी आमदनी के लोग इस पद के लिए हाथ पांव मार रहे हैं।
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राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के चुनाव में खर्च सीमा को इस बार 100 प्रतिशत बढ़ाया गया है। दस वार्ड वाली पालिका के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में अब चार लाख रुपये तक खर्च कर सकता है, जबकि इससे बड़ी पालिका के अध्यक्ष प्रत्याशी के लिए खर्च सीमा छह लाख रुपये है। पालिका सभासद के लिए व्यय सीमा 60 हजार रुपये है। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी की खर्च सीमा दो लाख और सदस्य के लिए यह सीमा 30 हजार रुपये रखी गई है।

2013 के नगर निकायों के चुनावों में ही चंपावत जिले के तीन निकायों के अध्यक्ष पद के लिए कुल 18 प्रत्याशी मैदान में थे। इस हिसाब से टनकपुर, चंपावत पालिका और लोहाघाट नगर पंचायत के अध्यक्ष पद की कुर्सी के दावेदारों ने चुनाव प्रचार में दो हफ्ते से कम समय में 31 लाख रुपये खर्च कर डाले।
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आखिर बगैर किसी मानदेय वाली इस कुर्सी के लिए इतनी होड़ क्यों? क्या इन पदों के लिए मैदान में कूदने वाले समाज सेवी हैं या वजह कुछ और? चंपावत विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हेमेश खर्कवाल ने 2002 में विधानसभा का पहला चुनाव नगर पालिका सदस्य रहते हुए जीता था।

नाम अधिकतम व्यय सीमा
पालिका अध्यक्ष- चार लाख रुपये (10 वार्ड तक) छह लाख (10 से अधिक वार्ड वाली पालिका)
पालिका सदस्य- 60 हजार रुपये
पंचायत अध्यक्ष- दो लाख रुपये
पंचायत सदस्य- 30 हजार रुपये

प्रधानों को हर माह मिलता है 1500 रुपये
नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों को मानदेय नहीं मिलता, मगर त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को यह सुविधा है। जिला पंचायतराज अधिकारी सुरेश बेनी ने बताया कि प्रधानों को 1500 रुपये, उप प्रधानों को 500, ब्लॉक प्रमुखों को 6 हजार, उप प्रमुखों को डेढ़ हजार, जिला पंचायत अध्यक्षों को 10 हजार, जिला पंचायत उपाध्यक्षों को पांच हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। इसके अलावा बीडीसी सदस्यों को प्रति बैठक 500, जिला पंचायत सदस्यों को प्रति बैठक एक हजार रुपये दिए जाते हैं।

नगर पंचायत एवं पालिका के सदस्यों और अध्यक्षों को मानदेय के रूप में एक भी रुपया नहीं मिलता है। निकाय प्रतिनिधियों के संगठन ने मानदेय की मांग भी की थी, लेकिन इसे नहीं माना गया। मानदेय नहीं मिलने से कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों की दिलचस्पी कम हो जाती है। - प्रकाश तिवारी, निवर्तमान अध्यक्ष नगर पालिका, चंपावत।
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