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बंद पड़े हैं लधिया घाटी के दोनों पशु प्रसार केंद्र

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रीठा साहिब (चंपावत)। लधिया घाटी में इस बार काश्तकार जहां एक तरफ खेतों में पड़ रहे सूखे से बेहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पशुपालन करना भी चुनौती बना हुआ है। इसकी वजह इस इलाके में मवेशियों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं होना है। क्षेत्र के दोनों पशु प्रसार केंद्र लंबे समय से बंद होने पशुपालकों को बीमार पशुओं के उपचार के लिए 45 किलोमीटर दूर खेतीखान आना पड़ रहा है। इसमें उनकी जेब पर खासी मार पड़ रही है। समय पर इलाज नहीं मिलने से 2017 में इस इलाके के चार दुधारू पशुओं समेत सहित कुल 21 मवेशियों की मौत हो चुकी है। अब ग्रामीणों ने इलाज की व्यवस्था नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

लधिया घाटी में लोग खेती के साथ पशुपालन करते हैं। क्षेत्र के चार हजार से अधिक पशुपालकों के लिए रीठा साहिब और भिंगराड़ा में दो पशुधन प्रसार केंद्र हैं। रीठा साहिब केंद्र में तो 2016 कोई कर्मचारी न होने से यह बंद पड़ा हुआ है। पिछले साल में पशुधन प्रसार अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से मार्च से भिंगराड़ा का पशु केंद्र भी बंद हो गया। इसके चलते मवेशियों के बीमार होने पर लधिया घाटी क्षेत्र के दो दर्जन गांवों के मवेशियों को इलाज के लिए तरसना पड़ रहा है।
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यहां के पशुओं के इलाज के लिए 45 किमी दूर खेतीखान या 59 किमी दूर लोहाघाट लाने की मजबूरी पशुपालकों के सामने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूरदराज के पशु अस्पताल तक पहुंचने में ही 500 रुपये तक का खर्च हो जाता है। यहां के लोग लंबे समय से पशुओं के इलाज की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हालत में कतई सुधार नहीं हो रहा है। ग्रामीण राकेश भट्ट, सुरेश, दीपक, दिनेश, विनोद, मोहन चंद्र, हेम भट्ट, हेम जोशी आदि ग्रामीणों ने लधिया क्षेत्र के पशु केंद्रों की व्यवस्था ठीक नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

पशुपालन अस्पतालों की तस्वीर ठीक नहीं
जिले में भले ही 2.45 लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पशुपालन पर आश्रित हैं, मगर यहां पशुपालन विभाग के हाल खुद ही खराब हैं। 9 पशुधन केंद्रों में पशु प्रसार अधिकारियों की भारी कमी है। जिले के 14 पशु अस्पतालों में से 9 में फार्मेसिस्ट भी नहीं है।
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कोट
रीठा साहिब व भिंगराड़ा के पशुधन प्रसार केंद्र कर्मी नहीं होने से बंद हैं। जिले में इसके अलावा कई अन्य केंद्रों में भी कर्मियों की कमी है। काम चलाने के लिए विभाग इन स्थानों में सचल पशु शिविर लगा राहत पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। -डॉ.बीएस जंगपांगी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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