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छह किमी सड़क ने तीन सौ परिवारों से छुड़वा दिया गांव

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चंपावत।
जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित कोट अमोड़ी ग्राम पंचायत आजादी के सात दशक बाद भी विकास की राह देख रहा है। ग्राम पंचायत में सड़क सुविधा के अभाव के चलते सैकड़ों परिवार पलायन कर चुके हैं। राज्य बनने से पूर्व तक इस ग्राम पंचायत में चार सौ परिवार निवास करते थे, लेकिन वर्तमान में महज सौ परिवार ही गांव में रह गए हैं।

गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए करीब छह किलोमीटर लंबी सड़क की जरूरत है।
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश चंद्र भट्ट, दुर्गादत्त भट्ट, बलदेव भट्ट, कमल भट्ट, हरीश भट्ट और दिनेश भट्ट बताते हैं कि साधन संपन्न ग्रामीण जहां अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अमोड़ी बाजार या चंपावत, टनकपुर का रुख करते हैं।
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वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण गांव में ही जीवन बिताने को मजबूर हैं। जब भी नई सरकार आती है तो गांव के लोगों को उम्मीद नजर आती है कि शायद इस दफा सड़क बन जाएगी, लेकिन अब तक मायूसी ही हाथ लगी है। सबसे अधिक समस्या मरीज को अस्पताल पहुंचाने में आती है, जिसमें महत्वपूर्ण समय बर्बाद होता है और कई बार मरीज दम भी तोड़ देता है। इस संबंध में विधायक कैलाश गहतोड़ी का कहना है कि गांव को जल्द ही सड़क सुविधा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट के अनुसार अब तक ग्रामीणों की ओर से सड़क से संबंधित कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया है। यदि प्रस्ताव मिलता है तो उसका परीक्षण कराया जाएगा।

खड़ी चढ़ाई के कारण कोई नहीं जाता गांव
चंपावत। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए छह किमी की खड़ी चढ़ाई होने के कारण कोई भी अधिकारी गांव तक नहीं पहुंचता। अधिक चढ़ाई होने के कारण कोई भी गांव आने में डरता है। जिस कारण आज तक इस गांव में कोई भी अधिकारी अभी तक नहीं पहुंच पाया है।
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छूट जाती है बेटियों की पढ़ाई
चंपावत। गांव से स्कूल अधिक दूर होने के कारण कई बेटियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है। स्कूल दूर होने के कारण आठवीं कक्षा पास करने के बाद कई बेटियां आगे की शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाती हैं।
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