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पंचायती दावेदारों का भी इम्तिहान लेंगे लोकसभा चुनाव के नतीजे

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चंपावत। 11 अप्रैल को मतदान 17वीं लोकसभा के लिए हुआ मगर ये चुनावी इम्तिहान सिर्फ राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और विधायकों का ही नहीं है बल्कि त्रिस्तरीय पंचायतों के भावी दावेदारों का भी है। 23 मई को उनकी ताकत और दावे दोनों की हकीकत जग-जाहिर होगी।
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चंपावत जिले में इस बार 193863 वोटरों में से 109901 (56.69 प्रतिशत) ने मतदान किया। ये मतदान पिछली बार से 1.71 प्रतिशत ज्यादा है। इस बार अधिक मतदान क्या असर दिखाया, इसका नफा-नुकसान किसको होगा, इसका पता तो नतीजे आने पर ही चलेगा। वहीं इस मतदान का असर केंद्र या प्रदेश की राजनीति पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि यह त्रिस्तरीय पंचायत के दावेदारों के लिए भी संकेत का काम करेगा।

चंपावत जिले के ग्रामीण इलाकों में करीब 82 मतदाता हैं। जिला पंचायत में ही 15 सीटें हैं। जिले के शहरी क्षेत्र के 29459 मतदाताओं में से 20714 ने और ग्रामीण क्षेत्र के 164404 मतदाताओं में से 89187 (52.24 प्रतिशत) लोगों ने वोट डाले।
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गांवों में न केवल ज्यादा मतदाता है बल्कि ये नतीजे इस साल जून में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे। चंपावत के जिला पंचायत सदस्य गोविंद सामंत, निर्मला महराना और पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुकेश महराना आदि का कहना है कि ये चुनाव ग्रामीण प्रतिनिधियों की ताकत और स्वीकार्यता को परखने का भी इम्तिहान होगा।

जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं जिले के दोनों विधायक
चंपावत जिले में चंपावत और लोहाघाट विधानसभा सीटें हैं। चंपावत के विधायक कैलाश चंद्र गहतोड़ी एक बार और लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल दो बार जिला पंचायत के सदस्य रह चुके हैं।

वहीं लोहाघाट के दो बार विधायक और एक बार कैबिनेट मंत्री रह चुके महेंद्र सिंह माहरा पिथौरागढ़ जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं। जबकि चंपावत के दो बार विधायक रह चुके हेमेश खर्कवाल नगर पालिका के सभासद रह चुके हैं।
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