चंपावत। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस) ने नौ फरवरी को हुए अस्पताल के विवाद में पब्लिक ट्रायल कराने का आरोप लगाते हुए सीएमओ से लिखित खेद जताने की मांग की है। बृहस्पतिवार को जिलाध्यक्ष डॉ. आरके जोशी और सचिव डॉ. प्रदीप बिष्ट के नेतृत्व में पीएमएस के प्रतिनिधिमंडल ने कलक्ट्रेट में डीएम से मुलाकात की। शुक्रवार को पीएमएस इस मसले पर ज्ञापन देगा।
संघ ने अभद्रता करने के आरोपी दो डॉक्टरों और एक पुरुष स्टाफ नर्स पर कार्यवाही के बावजूद लोहाघाट में 12 फरवरी को धरना करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा 11 फरवरी को जिला अस्पताल में बवाल की मंशा से आए लोहाघाट के चार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कहा कि इससे डॉक्टरों का मनोबल गिरा है।
उन्होंने हल नहीं निकलने पर मामले को प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (प्रदेश इकाई) में ले जाने की बात भी कही। पीएमएस के प्रतिनिधिमंडल में कोषाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह, अजय कुमार, डॉ. विवेक सिंह, श्वेत खर्कवाल, अमित देवल, बैंकटेश द्विवेदी शामिल थे। इधर डीएम रणवीर सिंह ने कहा कि यह विवाद स्वास्थ्य विभाग का आंतरिक प्रशासनिक मामला है। इस मामले को सीएमओ और प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ को बैठा कर सुलझा लिया जाएगा।
लोहाघाट में 12 फरवरी को हुआ सुलहनामा अस्पताल कक्ष में होना चाहिए था मगर परिस्थितियों के कारण ऐसा नहीं हो सका। उनकी मंशा किसी तरह के पब्लिक ट्रायल करने की नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने चंपावत में बुधवार को हुई पीएमएस की बैठक में इसे लेकर खेद जता दिया था। वे सरकारी स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने के लिए काम कर रहे हैं और करते रहेंगे। डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत।
क्या था विवाद
चंपावत जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों और एक पुरुष स्टाफ नर्स पर लोहाघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 9 फरवरी की रात अस्पताल स्टाफ के साथ अभद्रता करने का आरोप है। इसे लेकर 12 फरवरी को लोहाघाट के पैरा मेडिकल कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना दिया। इन पैरा मेडिकल कर्मियों का आरोप था कि जिला अस्पताल के दो डॉक्टर और एक स्टाफ नर्स ने मरीज के रूप में लोहाघाट अस्पताल पहुंच कर अभद्रता की। इसी मामले में जिला अस्पताल के आरोपी डॉक्टर और कर्मी को सार्वजनिक रूप से खेद जताना पड़ा था।