चंपावत। चंपावत जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर में पांच लोग डेंगू बुखार की चपेट में आए हैं। ये मामले बीते दो सप्ताह में सामने आए। निजी पैथोलॉजी सेंटर में हुई जांच में शुरुआती लक्षण मिलने के बाद हल्द्वानी में इन मामलों की पुष्टि हुई। इन तमाम लोगों के प्लेटलेट 60 हजार से कम पाए गए जबकि सामान्यतया एक व्यक्ति के शरीर में दो से ढाई लाख प्लेटलेट होते हैं। इन तमाम मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार है।
टनकपुर के राहुल जोशी, विपिन मुरारी, चंद्रशेखर जोशी, भुवन भट्ट और गंगा देवी बीते दो सप्ताह के भीतर डेंगू रोग की चपेट में आए हैं। राहुल जोशी के पिता दिनेश जोशी ने बताया कि बुखार आने पर शहर के एक निजी पैथोलॉजी केंद्र में जांच के बाद डेंगू के शुरुआती लक्षण मिलने पर वे हल्द्वानी सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। फिलहाल राहुल का इसी अस्पताल से इलाज चल रहा है। विपिन मुरारी का इलाज हल्द्वानी, चंद्रशेखर जोशी का इलाज दिल्ली में, गंगा देवी और भुवन भट्ट का उपचार खटीमा में चल रहा है।
आज टनकपुर का मुआयना करेंगी डॉ. माहरा
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में डेंगू बुखार का एक भी मामला पंजीकृत नहीं है। अलबत्ता अब डेंगू के लक्षण पाए जाने की जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी। डेंगू से बचाव के लिए संबंधित नगर पालिका को बेहतर तरीके से सफाई करने के लिए पत्र भेजा जाएगा। सीएमओ ने बताया कि शुक्रवार को जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. कामिनी माहरा को टनकपुर-बनबसा क्षेत्र में भेजा जा रहा है। डॉ. माहरा मरीजों का परीक्षण करने के साथ लोगों को डेंगू से बचाव को जागरूक करेंगी।
डेंगू मरीजों के लिए पांच अस्पतालों में है आइसोलेशन वार्ड
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि चंपावत जिले में डेंगू ग्रस्त मरीजों के लिए जिला अस्पताल चंपावत के अलावा लोहाघाट, पाटी-बाराकोट और टनकपुर में बने आइसोलेशन वार्ड में कुल 16 बिस्तर है। अलबत्ता इससे बचाव को सफाई बेहद जरूरी है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने बताया कि डेंगू एडीस मच्छर के काटने से होता है। इससे बचने के लिए पानी का जमाव न होने देने के साथ ही साफ-सफाई रखना जरूरी है।