चंपावत। पाटी विकासखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में संविदा कनिष्ठ अभियंता (जेई) की नियुक्ति में धांधली का आरोप लग रहा है। नियुक्ति की विज्ञप्ति की जानकारी तक कायदे से सार्वजनिक नहीं की गई। इस संबंध में कुछ लोग नियुक्ति प्रक्रिया पर अंगुली उठा रहे हैं। कहा जा रहा है कि नियुक्ति को गुपचुप तरीके से किया गया है। खुद खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सीएस मेवाड़ी महिला जेई की तैनाती के लिए प्राथमिकता देने की कतिपय जन प्रतिनिधियों द्वारा मौखिक निर्देश देने की बात कह रहे हैं।
अक्तूबर माह में पाटी विकासखंड में मनरेगा के लिए संविदा कनिष्ठ अभियंता की तैनाती की गई थी। इसके लिए बीडीओ की अध्यक्षता में चयन समिति बनाई गई। एक महिला अभ्यर्थी सहित कुल पांच आवेदन आए। इसमें महिला अभ्यर्थी की तैनाती हुई। गागर के लीलाधर ने पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए शिकायत की है। कहा कि उनके बेटे मनोज भट्ट ने नियुक्ति की भनक लगने पर अगस्त में ही बीडीओ को पत्र भेज रिक्त पद को भरे जाने की जानकारी देने का अनुरोध किया था। मगर उन्हें सार्वजनिक तौर पर विज्ञप्ति निकाले जाने की भनक नहीं लग सकी। उनका कहना है कि जेई की तैनाती के लिए आवेदन करने की जानकारी आम लोगों तक पहुंचने के लिए विज्ञप्ति तक नहीं दी गई।
वहीं बीडीओ मेवाड़ी का कहना है कि संविदा जेई के आवेदन की जानकारी के लिए विज्ञप्ति को ब्लाक के सूचना पट और सार्वजनिक स्थल पर चस्पा कराया गया था। कतिपय जन प्रतिनिधियों ने महिला अभ्यर्थी को प्राथमिकता देने को कहा था। साथ ही बीडीओ ने कहा कि चयनित महिला अभ्यर्थी इस काम के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
आरटीआई का भी जवाब नहीं मिला
नियुक्ति पत्रावली से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के अंतर्गत मांगी गई। मगर 30 दिनों से अधिक का वक्त बीतने के बावजूद आज तक जवाब नहीं मिल सका है। गागर गांव के लीलाधर ने मनरेगा के संविदा जेई के लिए निकाली गई विज्ञप्ति, आवेदक सहित समूची नियुक्ति प्रक्रिया की जानकारी मांगी। मगर 9 अक्तूबर को आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई जानकारी को निर्धारित समय बीतने के एक सप्ताह बाद नहीं मिल सका है।