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कहीं दूर जब दिन ढल जाए, शाम की दुल्हन बदन चुराए

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लोहाघाट (चंपावत)। सुरों के बादशाह मुकेश की 41 वीं पुण्यतिथि पर संगीत प्रेमियों की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। इस मौके पर लोगों ने मुकेश की याद में एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में श्रोता झूमते रहे।

लोहाघाट स्थित शिक्षक भवन में राजकीय इंटर कॉलेज के संगीत शिक्षक अनूप कौशल के निर्देशन में आयोजित संगीत संध्या में मुकेश को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अनमोल कलौनी ने कहीं दूर जब दिन ढल जाए शाम की दुल्हन बदन चुराए चुपके से आए.. गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। संजय ने जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे, बाल कलाकार चिन्मय नरियाल ने एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल, महिमा ने सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है, न हाथी है न घोड़ा है वहां पैदल ही जाना है, योगेश ने इक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है, शशांक जोशी ने किसी की मुस्कुराहटों से हो निखार किसी का दर्द मिल सके ले उधार जीना इसी का नाम है गीत गाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। संगीत शिक्षक कौशल ने जाने कहां गए वो दिन कहते थे तेरी याद में गीत की दिलकश प्रस्तुति दी।
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इसके अलावा संजय पंत ने संसार है एक नदिया सुख-दुख दो किनारे हैं, न जाने कहां जाएं, सोनिया ने चंदन सा बदन चंचल चितवन, प्रणव शर्मा ने हमने अपना सब कुछ खोया प्यार तेरा पाने को, रश्मि मेहता ने चांद सी मेहबूबा हो मेरी कब ऐसा मैने सोचा था गीत प्रस्तुत किया। तबले पर लोकेश पांडेय, महेंद्र सिंह घरती, अनमोल कलौनी थे। देर रात तक चले कार्यक्रम में कमल वर्मा, एडीओ उद्यान भूपेंद्र प्रकाश जोशी, राजकीय शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष पान सिंह मेहता, जीवन मेहता, ईश्वरी लाल साह, जीवन कलौनी, जगदीश खर्कवाल, किरन जुकरिया, भुवन भट्ट, श्रीकृष्ण जोशी, दिवाकर हालदार, वीके सिंह, ममता जोशी, प्रियंका जोशी, रुपाली जोशी, पकंज जोशी आदि मौजूद थे।
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