चंपावत। इस बार मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही जिले की लाइफ लाइन कहे जाने वाले टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले एक माह में बारिश के कारण आए मलबे से यह राष्ट्रीय राजमार्ग कई बार यातायात के लिए बंद हो चुका है। इस बार इस मार्ग पर दो नए स्थानों पर भूस्खलन के खतरनाक जोन विकसित हो गए हैं।
इनसे निपटने के लिए एनएच के साथ ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भी जूझना पड़ रहा है। नेशनल हाईवे पर धौन और स्वांला के बीच विकसित हुए नए खतरनाक क्षेत्र में मलबा गिरने से यात्री वाहन दो बार बाल-बाल बच चुके हैं। यह मार्ग जिले के पहाड़ी क्षेत्र को मैदानी क्षेत्र से जोड़ता है। इसलिए हाईवे में वाहनों का काफी दबाव रहता है।
आम तौर पर नेशनल हाईवे पर वर्ष भर वाहनों की आवाजाही सामान्य बनी रहती है। लेकिन बरसात के मौसम में मलबा वाहनों की राह रोक लेता है। मलबा हटाने के लिए कार्यदायी संस्था के अलावा आपदा प्राधिकरण की ओर से भी संवेदनशील स्थानों पर उपकरण रखे गए हैं। लेकिन इस बार धौन और स्वांला में विकसित हुए नए खतरनाक क्षेत्र के कारण मुसीबत पैदा हो गई है। जो मामूली बरसात में भी वाहनों की राह रोक ले रहा है।
मलबा आने से चार ग्रामीण सड़कें बंद
चंपावत। जिले में शुक्रवार की रात्रि आई भारी बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्र की चार सड़कें बंद हैं। इनमें कुल्यालगांव से साल, तामाचूला से भनार, रौसाल से चिलकोट और डुंगराबोरा से मटियानी सड़कें शामिल हैं। बोल्डर और मलबा आने से इनमें यातायात का पहिया जाम है।
चंपावत में हुई पांच एमएम बारिश
चंपावत। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को शारदा बैराज का डिस्चार्ज 111164 क्यूसैक और शारदा नदी का जल स्तर 220.25 मीटर रहा। शनिवार को चंपावत में पांच एमएम, लोहाघाट में सात एमएम, पाटी में आठ एमएम और बनबसा में छह एमएम बारिश रिकार्ड दर्ज की गई।