बनबसा (चंपावत)। गन्ना खरीद केंद्र में धीमी तोल से क्षेत्र के गन्ना किसान परेशान हैं। गन्ना सेंटर पर पर्याप्त मजदूर नहीं होने से उन्हें परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। किसान अपने मजदूरों के जरिये गन्ने की तोल करा रहे हैं। तोल शुरू होने के बारह दिनों बाद अभी केवल 600 क्विंटल गन्ने की ही तोल हो पाई है, जबकि क्षेत्र में करीब चालीस हजार क्विंटल गन्ने की पैदावार होती है।
क्षेत्र के गन्ना किसान सरकारी अव्यवस्था से खासे परेशान हैं। पहले तो गन्ना खरीद के लिए सेंटर शुरू करने में देरी की गई, जब सेंटर शुरू हुआ तो ट्रांसपोर्टर के मजदूर भाग गए। देरी से गन्ने की खरीद होने से किसानों को गेहूं की फसल बुआई में देरी हो रही है। क्षेत्र में गन्ना तोल कांटा 16 दिसंबर को लगा दिया गया था, लेकिन कछुआ गति से हो रही गन्ने की तोल से किसान परेशान हैं। उन्हें ट्रैक्टर-ट्रालियों का अतिरिक्त किराया भुगतान करने के अलावा अपने गन्ने की सुरक्षा भी करनी पड़ रही है। इस वर्ष सरकार ने गन्ने का न्यूनतम मूल्य सामान्य का 306 और अर्ली का मूल्य 316 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यहां से खरीदा गया गन्ना किच्छा चीनी मिल भेजा रहा है।
भाजपा किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश मंत्री और क्षेत्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक जगत सिंह मिताड़ी ने बताया कि तोल सेंटर पर चौकीदार नहीं होने से लोग किसानों के गन्ने चोरी कर ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के मूल्य में सरकार ने इस बार केवल एक रुपये की बढ़ोतरी की है जो नाकाफी है।
टनकपुर के प्रमुख गन्ना किसान और पूर्व पालिकाध्यक्ष जगत सिंह रावत ने बताया कि देरी से गन्ने की खरीद होने से गेहूं की बुआई का समय निकल रहा है। देरी से बुआई करने से गेहूं का उत्पादन कम होने की आशंका है। गन्ना उत्पादक हरीश श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने सितारगंज चीनी मिल को बंद कर दिया। देरी से गन्ना तोल कराने से सरकार किसानों को गन्ना नहीं बोने के लिए मजबूर कर रही है। गन्ना उत्पादक उस्मान खान ने बताया कि क्षेत्र के कई किसानों को पिछले वर्ष के गन्ने की खरीद का भुगतान भी नहीं किया गया है।