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तो कैसे पूरी होगी पंचेश्वर बांध परियोजना!

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चंपावत। भारत-नेपाल सीमा पर स्वीकृत पंचेश्वर बांध परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शीर्ष प्राथमिकताओं में है, लेकिन बीते कुछ महीनों से इसमें सुस्ताई देखी जा रही है। बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती के काम की रफ्तार बेहद धीमी है। काम जनवरी तक पूरा होना था, मगर बजट नहीं मिलने से काम अभी तक अधूरा है।
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करीब 40 हजार करोड़ रुपये से बनने वाली पंचेश्वर बांध परियोजना के लिए फिलहाल 22 लाख रुपये भारी पड़ रहे हैं। डूब क्षेत्र के पेड़ों की गिनती के लिए खर्च की जानी वाली यह रकम वन विभाग को नहीं मिल सकी है, जबकि धन की मांग को लेकर पिछले साल 22 सितंबर और 15 दिसंबर को फिर से पत्र भेजा गया, लेकिन केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की जल संसाधन ऊर्जा, आधारभूत ढांचा विकास (वाप्कोस) कंपनी की ओर से ये रुपये आज तक नहीं मिले।

26 दिसंबर से शुरू गिनती में पहली जनवरी तक सात दिनों में 31354 और इसके बाद 48 दिनों (2 जनवरी से 18 फरवरी) में केवल 19 हजार पेड़ ही गिने जा सके। वन विभाग का कहना है कि अब तक करीब 50 हजार पेड़ ही गिने जा सके हैं।
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पेड़ों की गिनती के लिए चिल्रियां पुल, तामली, किमतोली, रौसाल और लोहाघाट क्षेत्र में टीमें बनाई गईं। इसके लिए मजदूरों का भुगतान दैनिक आधार पर करना था, लेकिन धन नहीं मिलने से ये भुगतान शुरुआत में तो वन अधिकारियों ने अपनी जेब से किया, बाद में मजदूरों की संख्या कम कर दी गई।

पेड़ों की गिनती की जिम्मेदारी संभालने वाले काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने दो जनवरी को रुपये न मिलने से गिनती पर असर पड़ने की बात कहते हुए डीएम को पत्र भी भेजा। वहीं डीएफओ कुबेर सिंह बिष्ट का कहना है कि धन की मांग की गई है। उम्मीद है कि यह रकम शीघ्र मिल जाएगी।

पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती के लिए मांगी गई रकम स्वीकृत हो गई है। बांध निर्माण करने वाली संस्था वाप्कोस ने रकम वन विभाग के खाते में भेजने के लिए प्रभागीय वनाधिकारी का बैंक खाता नंबर मांगा है। जल्द ही ये रकम वन विभाग तक पहुंच जाएगी। - हेमंत कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी, चंपावत।

पेड़ों की गिनती में आएगा अवरोध!
वनाग्नि काल (15 फरवरी से 15 जून तक) में वन अधिकारियों, कार्मिकों को खास चौकसी बरतने की हिदायत दी गई है। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह ने 15 फरवरी को सभी डीएम को पत्र भेज वनाग्नि की रोकथाम, प्रभावी नियंत्रण के निर्देश जारी किए हैं।

इसमें वनाग्नि काल में क्षेत्रीय प्रभागों के अधिकारियों, फील्ड कर्मियों की ड्यूटी जिला स्तर पर केंद्र, राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, मूल्यांकन, अनुश्रवण में न लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में वन कर्मियों द्वारा पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती को लेकर भी संशय की नौबत आ सकती है। इधर डीएफओ केएस बिष्ट का कहना है कि बांध डूब क्षेत्र के पेड़ों की गिनती प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाएंगी।

डूब क्षेत्र में है 76 वर्ग किमी भू भाग
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की जल संसाधन ऊर्जा व आधारभूत ढांचा विकास (वाप्कोस) कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक पंचेश्वर बांध परियोजना में करीब 76 वर्ग किमी भू भाग शामिल है। तकरीबन 31 हजार परिवार डूब क्षेत्र से प्रभावित होंगे। पुनर्वास, विस्थापन में ही 9389 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बांध से 5040 मेगावाट बिजली उत्पादन के अलावा सिंचाई भी होगी।
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