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दिव्यांगों को पेंशन देने के लिए सरकार के पास धन नहीं

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चंपावत। दिव्यांगों को अन्य सुविधाएं तो दूर, नियमित रूप से पेंशन को भी तरसना पड़ रहा है। चंपावत जिले के दिव्यांगों को बीते पांच महीनों से दिव्यांग पेंशन नहीं मिली है।
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चंपावत जिले में कुल 2411 दिव्यांग हैं। इसमें 18 वर्ष से कम उम्र के 288 दिव्यांग हैं। उन्हें एक हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाती है, लेकिन इस साल जून के बाद से उन्हें पेंशन राशि नहीं मिली है। नियमित रूप से पेेंशन नहीं मिलने से दिव्यांगों को दुश्वारी झेलनी पड़ रही है। इधर सहायक जिला समाज कल्याण अधिकारी डीडी आर्या का कहना है कि धन की कमी से दिव्यांगों को पेंशन नहीं दी जा सकी है। शासन से बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर बकाया पेंशन की रकम दिव्यांगों के बैंक खातों में डाल दी जाएगी।

दिव्यांग छात्रों को एक साल से बगैर वेतन पढ़ा रहे विशेष शिक्षक
चंपावत। दिव्यांगों के साथ ही उन्हें पढ़ाने वालों की भी मुसीबत कम नहीं है। चार विकासखंड वाले चंपावत जिले में दिव्यांगों को पढ़ाने के लिए दो विशेष शिक्षक हैं। दो विकासखंड में एक भी विशेष शिक्षक नहीं है। वहीं इन शिक्षकों का मानदेय भी कई महीनों से नहीं मिल सका है।
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जिले में छठीं से बारहवीं कक्षा तक के 303 दिव्यांग छात्र-छात्राएं हैं। इन छात्रों को लेखन सामग्री और गणवेश का भुगतान नहीं किया जा सका है। छात्रों को पढ़ाने के लिए पाटी और बाराकोट विकासखंड में कोई विशेष शिक्षक नहीं है। मात्र दो ब्लॉक चंपावत और लोहाघाट में एक-एक विशेष शिक्षक है लेकिन इन शिक्षकों को वेतन के लाले पड़ रहे हैं। विशेष शिक्षक संगठन के ईश्वरी दत्त जोशी ने बताया कि करीब एक साल से मानदेय नहीं मिला है। इधर जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक) दिलेर सिंह का कहना है कि बजट की कमी से मानदेय नहीं दिया जा सका है।
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