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सीएचसी में 16 साल बाद लटकेगा ताला

Sat, 21 Oct 2017 09:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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अतीत का हिस्सा रह जाएगा चंपावत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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 प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी द्वारा अप्रैल 2001 में शुरू किए गए चंपावत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर अब अगले कुछ दिनों में ताला लटक जाएगा। यह अस्पताल इतिहास का हिस्सा बन जाएगा और  इसके स्थान पर इस भवन में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय शुरू किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा इस अस्पताल भवन के मुख्य द्वार पर बोर्ड भी चस्पा कर दिया गया है। अस्पताल के तमाम पदों को अन्यत्र समायोजित किया जाएगा। 
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सितंबर 1997 में जिला बनने के करीब चार साल बाद मुख्यालय में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को उच्चीकृत कर सीएचसी बनाया गया। इसके लिए एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पीएचसी के नजदीक नया भवन भी बनाया गया। मगर अब यह अस्पताल बंद हो जाएगा। डॉक्टरों के 9 सृजित पदों में से यहां इस वक्त तैनात एक भी नहीं है। सीएचसी के दोनों डॉक्टर महिला चिकित्साधिकारी डॉ. श्वेता खर्कवाल और दंत शल्यक डा. काशिद अहमद को जिला अस्पताल संबद्ध किया गया है।

 वैसे डॉक्टरों सहित कुल 47 पद सृजित हैं, मगर 24 पद रिक्त हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी भी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के पास है। अलबत्ता फार्मेसिस्ट मुकुल कुमार राय के अलावा तीन स्टाफ नर्स, दो स्वास्थ्य निरीक्षिका, एक प्रवर सहायक, डार्क रूम सहायक सहित कुल 23 कर्मी हैं।  सीएमओ डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि इन पदों को ट्रॉमा सेंटर, जिला अस्पताल सहित जरूरत के हिसाब से अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में समायोजित किया जाएगा। सीएचसी को 31 अक्तूबर तक हटा नवंबर से इस भवन में सीएमओ कार्यालय का संचालन शुरू हो जाएगा। सीएमओ कार्यालय के अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम का संचालन भी इसी भवन से किया जाएगा।  
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कोट  
पांच किलोमीटर के दायरे में दो अस्पतालों की जरूरत नहीं है। यद्यपि सीएचसी में कुछ कर्मी कार्य कर रहे हैं, लेकिन काफी समय से ये अस्पताल निष्प्रयोज्य हाल में है। जिला अस्पताल से स्वास्थ्य संबंधी सभी गतिविधियां चल रही हैं। यहां के कर्मियों को आवश्यकता के हिसाब से दूसरी जगह समायोजित किया जाएगा।  
डॉ.एमएस बोहरा,  
मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।  

सीएमओ कार्यालय भवन को नहीं मिला बजट  
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नियंत्रित करने वाला सीएमओ कार्यालय खुद अपने भवन के लिए तरसते रहा। कार्यालय खुलने के बाद इसे पुराने पीएचसी के ऑपरेशन थिएटर वाले कुछ कमरों में चलाया गया। जिसमें जगह का अभाव रहा। सीएमओ कार्यालय भवन के लिए बीते डेढ़ दशक से राज्य योजना में प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन ये प्रस्ताव कभी स्वीकृत नहीं हुआ।
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