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जल्द पूरा होगा ब्लड बैंक का सपना

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चंपावत।
सितंबर 1997 को अस्तित्व में आए चंपावत जिले में जल्द ही अपना ब्लड बैंक होगा। ब्लड बैंक भवन होने के बावजूद इसके संचालन नहीं होने से यहां लोगों को समय पर खून मिलने में परेशानी रहती है। केंद्रीय टीम का निरीक्षण नहीं हो पाने से ब्लड बैंक का संचालन नहीं हो पा रहा था। अलबत्ता अब इस महीने केंद्र व राज्य की टीम निरीक्षण के लिए आ रही है। इसके बाद जल्द ही ब्लड बैंक के लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

चंपावत जिला अस्पताल परिसर में 22.90 लाख रुपये की लागत से 2012 में ब्लड बैंक भवन बना। लेकिन पांच साल से अधिक समय बीतने के बावजूद ब्लड बैंक अस्तित्व में नहीं आ सका। नवंबर 2015 में आए राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बिजेंद्र जैन ने ब्लड बैंक शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए नोटिस दिया था। मगर नोटिस के जवाब और दूसरी प्रक्रिया में ही मामला उलझा रहा। जन दबाव के चलते पिछले साल मई से ब्लड स्टोरेज जरूर शुरू हो सका। लेकिन इसमें भी हर महीने बमुश्किल 15 यूनिट ही खून की उपलब्धता हो पाती है।
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अब केंद्र व राज्य सरकार की टीम के इस महीने के आखिर में निरीक्षण करने आएगी। इसके बाद ब्लड बैंक की लाइसेंसिंग प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। जिले की ब्लड स्टोरेज की मदर यूनिट पिथौरागढ़ पर निर्भरता खत्म होगी। साथ ही यहां हर वक्त खून की उपलब्धता होगी।

कोट
ब्लड बैंक के लिए भवन से लेकर सभी जरूरी उपकरण मौजूद है। पैथोलॉजिस्ट से लेकर लैब तकनीशियन सहित जरूरी स्टाफ भी मौजूद है। 28 मार्च को ब्लड बैंक के आधारभूत ढांचे व अन्य सुविधाओं के निरीक्षण के लिए केंद्र व राज्य सरकार की टीम आएगी। इस मुआयने के बाद चंपावत ब्लड बैंक को लाइसेंस मिल सकेगा तथा जल्द ही ब्लड बैंक शुरू हो सकेगा।
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डॉ.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल, चंपावत।


गर्भवती व गंभीर रोगियों को ही मिल पाता है रक्त
चंपावत। जून 2016 में एक प्रसूता की खून की कमी से हुई मौत के बाद यहां ब्लड बैंक शुरू करने की मांग को जबर्दस्त आंदोलन हुआ। मगर ब्लड बैंक फिर भी शुरू नहीं हो सका था। अलबत्ता मई 2017 से ब्लड स्टोरेज जरूर काम करने लगा। ब्लड स्टोरेज यूनिट में हर माह 15 यूनिट रक्त मिलता था। इसके लिए भी वह मदर यूनिट पर निर्भर रहता है। इसके जरिये मुख्य रूप से गर्भवती और गंभीर रोगियों को ही रक्त मिल पाता था। ब्लड स्टोरेज में लोगों से खून लेकर रखने की सुविधा नहीं होती है। जबकि ब्लड बैंक में खून देकर जरूरतमंद को किसी भी ग्रुप का खून सुलभ होगा।
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