चंपावत राजकीय पॉलीटेक्निक में जगह की कमी से इस तरह रखा गया है प्रायोगिक कार्य का सामान।
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लिराजकीय पॉटेक्निक चंपावत के हाल दयनीय है। तमाम प्रयासों के बावजूद जगह की कमी अवरोध बनी हुई है। कॉलेज में प्रयोगशाला तक नहीं है, जिस कारण प्रायोगिक कार्य नहीं हो पा रहे हैं। छात्र-छात्राओं को 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट के पॉलिटेक्निक कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिले में लोहाघाट के अलावा टनकपुर और चंपावत में दो नए पॉलिटेक्निक खुल गए, मगर जिला मुख्यालय में करीब चार साल पूर्व स्वीकृत पॉलिटेक्निक के हाल बुरे हैं। संस्थान नगर पालिका के चंद कमरों में संचालित हो रहा है। छात्र-छात्राओं को प्रायोगिक कार्य के लिए लोहाघाट जाना पड़ता है। कॉलेज मेें दो ट्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रिकल स्वीकृत हैं, लेकिन पढ़ाई सिर्फ एक ही ट्रेड मेें हो रही है। जिसमेेें मात्र 30 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं और पढ़ाने के लिए छह अनुदेशक हैं।
राजकीय पॉलिटेक्निक में जगह की कमी बड़ी चुनौती है। इसके चलते न यहां प्रायोगिक कार्य हो पा रहे हैं और न ही स्वीकृत ट्रेड इलेक्ट्रिकल चल पा रहे हैं। फिर भी शिक्षक बेहतर पढ़ाई के लिए प्रयासरत हैं।
-कमलेश कुमार, प्रभारी, राजकीय पॉलिटेक्निक, चंपावत।
जून से बंद है निर्माण कार्य
चंपावत राजकीय पॉलिटेक्निक के भवन के लिए चौड़ासेठी गांव में जमीन तलाशने के बाद 2016 से काम शुरू हो गया था। पॉलिटेक्निक के प्रभारी कमलेश कुमार ने बताया कि 5.32 करोड़ रुपये से बनने वाले भवन के लिए दो करोड़ रुपये अवमुक्त हो चुके हैं, मगर जून 2017 से काम बंद है। काम जल्द शुरू करने के लिए कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम से आग्रह किया गया है।
दूसरे केंद्रों में संबद्ध हैं तीन विभागाध्यक्ष
जिले के सबसे पुराने राजकीय पॉलिटेक्निक लोहाघाट के तीन विभागाध्यक्षों को दूसरे केंद्रों में संबद्ध किया गया है। फार्मेसी के विभागाध्यक्ष को चंपावत पॉलिटेक्निक, सिविल अभियंत्रण के विभागाध्यक्ष को बरम और इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड के विभागाध्यक्ष को बेड़ीनाग राजकीय पॉलिटेक्निक संबद्ध किया गया है।