चंपावत। बुजुर्ग परमानंद शर्मा अब दुनिया में नहीं है। मगर जिस तरह से इलाज के अभाव में उनकी मौत हुई, वह कई गंभीर सवालों को खड़ा करता है। दो दिन पहले 23 सितंबर को ही दुनिया की सबसे बड़ी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान) का शुभारंभ हुआ था। दावा था कि गरीबों को भी इलाज से वंचित नहीं रहना पड़ेगा।
मगर लोहाघाट विकासखंड के सुदुर्का गांव के इस अंत्योदय कार्डधारी का नाम योजना के लाभार्थियों में ही शामिल नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता भुवन सुतेड़ी का कहना है कि अंत्योदय होने के बावजूद उन्हें इलाज के लिए अन्य कोई सुविधा भी नहीं मिल सकी। बताते चलें कि सामाजिक, आर्थिक और जातिगत जनगणना सर्वेक्षण 2011 के आधार पर चयनित परिवारों के सत्यापन के बाद पीएम-जय योजना में जिले में 9829 परिवार चयनित हुए। इधर डीएम एसएन पांडेय का कहना है कि योजना में नाम नहीं होने से निजी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज देना संभव नहीं है। अलबत्ता गरीब व्यक्ति को रेडक्रॉस से अधिकतम दो हजार रुपये तक की मदद देने के अलावा सीएम राहत कोष से मदद दी जाती है।
खाई में गिरने से घायल हुए थे सुदुर्का गांव के बुजुर्ग
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट विकासखंड के सुदुर्का गांव में खाई में गिरकर गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग ने इलाज के अभाव में मंगलवार को दम तोड़ दिया। परिजन धनाभाव में इलाज नहीं करा सके। रविवार को हल्द्वानी से वापस घर ले आए थे।
प्रधान गीता देवी ने बताया कि शनिवार शाम को परमानंद शर्मा (62) पुत्र कामदेव शर्मा खेतों में घास काटने गई थी। अपनी पत्नी बची देवी को चाय देने गए थे। इसी दौरान उनका पांव फिसल गया और वह 150 फुट गहरी खाई में गिर गए। सामाजिक कार्यकर्ता भुवन सुतेड़ी ने बताया कि लोहाघाट अस्पताल से हल्द्वानी रेफर हुए। हल्द्वानी से आगे रेफर किया गया, लेकिन धन नहीं होने से रविवार को गांव लौट आए। मंगलवार को अपराह्न दो बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। परमानंद शर्मा का अंतिम संस्कार ऋषेश्वर घाट पर किया गया। भतीजे लक्ष्मी दत्त ने चिता को मुखाग्नि दी।