टनकपुर (चंपावत)। 1991 की संधि के तहत बन रहे भारत-नेपाल सीसी मार्ग के निर्माण में नेपाल की आपत्ति के बाद रोक लगा दी गई है। पहले करीब दो सौ मीटर हिस्से में सड़क निर्माण पर आपत्ति लगाने के बाद अब नेपाल ने सड़क के एलायमेंट पर ही आपत्ति लगा दी है। अब विवाद का हल निकलने एवं नेपाल सरकार के फैसले के बाद ही सड़क का निर्माण शुरू हो पाएगा।
एनएचपीसी पावर स्टेशन निर्माण को लेकर वर्ष 1991 में भारत-नेपाल के बीच हुई संधि के तहत टनकपुर बैराज से नेपाल को सड़क सुविधा से जोड़ने के साथ ही जलापूर्ति के लिए 1.2 किमी लंबी चैनल (नहर) का निर्माण कराकर देना है। इसी के तहत बैराज से ब्रह्मदेव (नेपाल) तक 5.84 करोड़ रुपये की लागत से 1.3 किमी लंबे सीसी मार्ग का निर्माण शुरू किया।
इस बीच नेपाल के विभिन्न संगठनों ने ब्रह्मदेव से दो सौ मीटर पहले तक की भूमि को विवादित बताते हुए विरोध जताया तो भारतीय प्रशासन ने विवादित दो सौ मीटर हिस्से पर निर्माण कार्य रुकवा दिया था, लेकिन अब नेपाल ने पूरे मार्ग के एलायमेंट पर ही आपत्ति जताई है। इसके बाद कार्यदायी विभाग ने पूरे मार्ग का निर्माण कार्य बंद कर दिया है। कार्यदायी विभाग के अधिशासी अभियंता आरके पुनेठा ने बताया कि नोडल एजेंसी एनएचपीसी के निर्देश पर निर्माण कार्य रोका गया है। उन्होंने बताया कि नेपाल द्वारा मार्ग के एलायमेंट पर आपत्ति लगाई है। जिसका हवाला देते हुए एनएचपीसी द्वारा निर्माण रुकवाया गया है।
एनएचपीसी, पीआईयू और नेपाल के अधिकारियों की हुई बैठक
टनकपुर। भारत-नेपाल सीसी मार्ग निर्माण को लेकर शुक्रवार को भारत-नेपाल के अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई। कार्यदायी विभाग परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) के ईई आरके पुनेठा ने बताया कि नेपाल सिंचाई विभाग एवं सड़क निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में नेपाल के अधिकारियों का कहना था कि सड़क के एलायमेंट और सीमा विवाद की रिपोर्ट नेपाल सरकार को भेजी गई है।
सरकार से कोई निर्देश मिलने तक सड़क का निर्माण न किया जाए। इस बैठक में भारत की ओर एनएचपीसी के महाप्रबंधक रईस मियां एवं अन्य अधिकारियों के अलावा पीआईयू के अधिकारी मौजूद थे।