चंपावत। चंपावत विकासखंड की ढिलाई से प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के 84 लाभार्थियों को एक साल बाद भी लाभ नहीं मिल सका है। इसकी वजह आवास निर्माण की जमीन की जीओ टैगिंग ही नहीं हो सका है।
सीडीओ एसएस बिष्ट ने की ग्राम विकास विभाग की समीक्षा में पाया गया कि पिछले साल जिले में 815 आवासों के सापेक्ष 223 लाभार्थी अपात्र पाए गए। जिले के 592 पात्र लाभार्थियों के चंपावत ब्लाक में 98 आवास हैं। इनमें भी चार माह बीतने के बाद जीओ टैग नहीं होने से काम शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते तीसरी किश्त रिलीज नहीं की जा सकी है। विभाग जीओ टैग नहीं होने की वजह नेटवर्क की कमी को बता रहा है।
सार्वजनिक 60 आवास डांडा ककनई के हैं। सीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी किशोर रावत को निलंबन की चेतावनी देते हुए पीडी और जिला कार्यक्रम अधिकारी की टीम बनाकर मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। टीम में बेयरफुट टेक्निशियन रोजगार सहायक शामिल होंगे, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।
समीक्षा में उन्होंने स्थापना संबंधी, अभिलेख, भवन निर्माण, मनरेगा के कार्यों का निरीक्षण किया। स्थापना संबंधी फाइल में जीपीएफ व सेवा पुस्तिका को चेक किया। जिसमें कई प्रविष्टियां अधूरी मिली। सीडीओ ने एक सप्ताह में सभी कर्मियों का जीपीएफ मार्च के बाद जमा करने व सेवा पुस्तिका में अपूर्ण प्रविष्टियों को पूर्ण करने के आदेश दिए। मनरेगा के पिछले वित्त वर्ष के कार्यों की प्रगति भी 50 प्रतिशत है। इस वर्ष के भी काम केवल तीन फीसदी ही पूरे हुए हैं।