चंपावत।
संस्थागत प्रसव को प्रेरित करने को जननी सुरक्षा योजना सहित कई सरकारी योजनाएं संचालित हो रही हैं, मगर जमीन पर यह योजनाएं कैसे काम करती हैं, इसकी एक बानगी बृहस्पतिवार को नजर आई। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर मौनपोखरी गांव की एक प्रसव पीड़िता को जिला अस्पताल ने रेफर किया, लेकिन महिला ने रास्ते में शिशु को जन्म दे दिया। उसको आपात चिकित्सा सेवा 108 भी नहीं मिल सकी और प्राइवेट वाहन से पिथौरागढ़ के अस्पताल ले जाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल के एक स्टाफ ने गर्भवती को एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाने को कहा।
मौनपोखरी की रेखा देवी (30) पत्नी कैलाश राम को बृहस्पतिवार तड़के एक बजे दर्द उठा। तीन किलोमीटर पैदल सड़क पर पहुंचने के बाद आपात चिकित्सा सेवा 108 के जरिए सुबह चार बजे जिला अस्पताल लाया गया। रेखा के देवर सुनील का आरोप है कि दर्द से कराह रही रेखा को वक्त पर इलाज नहीं मिला। काफी देर तक उन्हें वार्ड में न ले जाकर बाहर बेंच में ही लिटाए रखा। अस्पताल कर्मी से काफी निवेदन करने पर करीब एक घंटे बाद उन्हें देखा गया और फिर महिला को पास के ही एक निजी अस्पताल ले जाने को कहा गया। रेखा को निजी अस्पताल ले जाया भी गया, लेकिन वहां भी डॉक्टर नहीं होने से इलाज नहीं मिल सका। निजी अस्पताल से महिला को वापस जिला अस्पताल लाया गया।
मामले की भनक लगते ही जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी स्वयं सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंचे और उन्होंने गर्भवती की स्थिति को देखते हुए आपात चिकित्सा सेवा 108 के जरिये पिथौरागढ़ महिला अस्पताल भेजने का प्रयास किया। मगर चंपावत की 108 सेवा के दियूरी जाने और लोहाघाट आपात सेवा के नहीं पहुंचने से महिला को प्राइवेट वाहन से ले जाया गया। इस बीच दिन में करीब 12 बजे रास्ते में घाट के पास महिला ने शिशु को जन्म दिया। इस वक्त महिला का पिथौरागढ़ के महिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
कोट
अस्पताल की ओर से इलाज में कोताही नहीं की गई, बल्कि गर्भवती का सामान्य रूप से प्रसव होना कठिन था। महिला का पांचवां प्रसव था, इस कारण सावधानी की जरूरत थी। गर्भवती महिला को ऑपरेशन की भी जरूरत पड़ सकती थी, इसके चलते रेफर किया गया।
डॉ.आरके जोशी,
मुख्य चिकित्साधीक्षक,
जिला अस्पताल, चंपावत।