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मामूली इलाज तो मिल नहीं रहा, देख रहे बेस अस्पताल के सपने

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चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल में गाइनाकोलोजिस्ट (स्त्रीरोग विशेषज्ञ), हृदयरोग विशेषज्ञ जैसे कई अहम पद खाली हैं। इसके चलते गर्भवती महिलाओं के जटिल प्रकरणों से लेकर दिल की बीमारी से ग्रस्त रोगियों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी हो रहा है। संसाधनों की कमी से समय पर इलाज नहीं मिलने से कई मौतें भी हो चुकी है। इन कमियों को दूर करने के बजाय जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर बेस अस्पताल बनाने की कवायद हो रही है। इसके लिए सितंबर 2018 से इस साल जनवरी तक कई बार धन की मांग की जा चुकी है। मगर धन अब तक नहीं मिल सका।

60 बेड के जिला अस्पताल को 2015 में बेस अस्पताल के रूप में स्थापित करने की प्रशासनिक मंजूरी मिली थी। इसके तहत इस अस्पताल की क्षमता 200 बेड की जानी है। प्रशासनिक स्वीकृति के बावजूद धन नहीं मिलने से लंबे समय तक ये पत्रावली ठंडे बस्ते में चली गई थी। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेकर फिर से पहल की। सीएमओ डॉ.आरपी खंडूरी ने बताया कि कार्यदाई संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम (सीएनडीएस) ने पहले चरण के काम के लिए 276.70 लाख रुपये की मांग की। इसको लेकर सितंबर 2018 से इस साल 25 जनवरी तक स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेज बजट के लिए आग्रह किया गया। मगर एक भी रुपया अब तक रिलीज नहीं हुआ।
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जिले में नौ माह से नहीं है एक भी गायनाकोलोजिस्ट
चंपावत जिले में बीते नौ माह से एक भी गायनाकोलोजिस्ट (स्त्रीरोग विशेषज्ञ) नहीं है। जबकि गायनाकोलोजिस्ट के यहां चंपावत, टनकपुर और लोहाघाट के अस्पताल में तीन पद सृजित हैं। डॉ.संगीता त्रिपाठी के ऊधमसिंह नगर जिला स्थानांतरण होने के बाद से जिला अस्पताल में पिछले साल 22 जुलाई से गायनाकोलोजिस्ट का पद रिक्त है। जबकि इससे पूर्व चार जुलाई 2018 को नैनीताल की महिला अस्पताल से डॉ.मंजू रावत के चंपावत जिला अस्पताल स्थानांतरण के आदेश हुए थे। लेकिन उन्होंने यहां कभी ज्वाइन नहीं किया। बगैर ज्वाइनिंग के ही 24 सितंबर को उन्हें नैनीताल भेज दिया गया।
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जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की खामियां
लोहाघाट और टनकपुर में दो ट्रामा सेंटर हैं, लेकिन डॉक्टरों की तैनाती और उपकरण नहीं होने से एक भी सेंटर चल नहीं पा रहा है।
टनकपुर में एक्सरे मशीन ठीक है, लेकिन 15 जनवरी से एक्सरे करने वाला कर्मी नहीं।
लोहाघाट में पिछले साल सितंबर से खराब एक्सरे मशीन की मरम्मत को धन नहीं, मगर एक्सरे कर्मी है।
पाटी की एक्सरे मशीन चलाने के लिए कोई तकनीशियन नहीं।
टनकपुर की अल्ट्रासाउंड मशीन के उपयोग के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं।
कोट
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा कर व्यवस्था को सुधारा जाएगा। गायनाकोलोजिस्ट की तैनाती के लिए स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा जाएगा। साथ ही एक्सरे मशीनों के संचालन के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
रणवीर सिंह चौहान,
जिलाधिकारी, चंपावत।
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