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जिला अस्पताल में दिल का दौरा पड़ा, मौत

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चंपावत। लोहाघाट विकासखंड के कायल गांव के एक ग्रामीण की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मृतक मुरादाबाद में गाड़ी चलाता था। डॉक्टरों का कहना है कि पर्याप्त संसाधन होते तो युवक को बचाया जा सकता था।
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कुंवर सिंह (42) पुत्र मोहन सिंह 13 अक्तूबर को ही नवरात्र की पूजा के लिए परिवार सहित गांव आया था। सोमवार को तबियत बिगड़ने पर परिजन उन्हें प्राईवेट अस्पताल ले गए। इसके बाद सुबह करीब साढ़े 11 बजे उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें दिल का दौरा पड़।

जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने बताया कि कुंवर सिंह आपात चिकित्सा सेवा में तैनात डॉ. वेंकटेश द्विवेदी और अन्य डॉक्टरों ने करीब सवा घंटे तक उन्हें बचाने का प्रयास किया मगर अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
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कुंवर सिंह के चार बच्चे हैं। गांव के प्रताप सिंह और जोगा सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार मंगलवार को होगा। एकाएक हुई इस वारदात से उनकी पत्नी नीलावती और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।

अस्पताल में चार साल से नहीं है कार्डियोलॉजिस्ट
चंपावत। जिला अस्पताल में दिल के इलाज की खास सुविधा नहीं है। कार्डियोलॉजिस्ट का पद 2014 से खाली है। सीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि ईसीजी मशीन और इको कार्डियोग्राफी मशीन तो है, लेकिन हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं होने से दिक्कत होती है। अलबत्ता इन मशीनों से इस वक्त फिजिशियन मरीजों का परीक्षण करते हैं। जिला अस्पताल में सघन निगरानी केंद्र (आईसीयू) नहीं होने से भी दुश्वारी आ रही है।

बढ़ रहे हैं दिल के रोगी
चंपावत। जिले में हृदय रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। जनवरी 2017 से पिछले माह तक यहां 39 लोगों की हृदयरोग से मौत हो चुकी है। तीन सप्ताह पूर्व ही जिला पंचायत के अभियंता प्रकाश चौधरी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। पिछले एक साल में सात प्रतिशत हृदय रोगी बढ़ गए हैं।

सालभर में 35 हजार रोगियों में से 2500 से ज्यादा में हृदय रोग के शुरुआती लक्षण पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 40 साल की उम्र के बाद लिपिड प्रोफाइल टेस्ट और हृदयरोग से संबंधित जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही संतुलित जीवन शैली, हल्की सैर, सेहतमंद खानपान, तनाव से बचाव भी जरूरी है।
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