चंपावत। 26 सितंबर को आपात सेवा 108 मिलने में चार घंटे से अधिक देरी की कीमत पाटी विकासखंड के करौली गांव के मनोज को जान गंवाकर भुगतनी पड़ी। दिमागी बुखार से पीड़ित मनोज को जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजन मनोज को हल्द्वानी सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज ले गए थे।
तबियत बिगड़ने के चलते सुशीला तिवारी से भी मनोज को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। धन के अभाव में परिजन उसे घर वापस ले आए थे। बृहस्पतिवार को मनोज ने घर पर ही दम तोड़ दिया।
सड़क से कटे करौली गांव निवासी मनोज राम (27) पुत्र गोविंद राम दिमागी बुखार से पीड़ित था। 26 सितंबर को उन्हें करौली से मैरोली तक आठ किमी चारपाई के सहारे लाया गया, मगर तेल की कमी से पाटी की आपात सेवा नहीं मिल सकी। चार घंटे इंतजार के बाद चंपावत की आपात सेवा से मनोज को जिला अस्पताल लाया गया।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने बताया कि दिमागी बुखार के चलते मनोज को 27 सितंबर को हायर सेंटर रेफर किया गया था। परिजनों ने बताया कि हालत बिगड़ने पर हल्द्वानी से भी आगे रेफर किया गया, लेकिन धन नहीं होने पर परिजन उसे हायर सेंटर ले जाने के बजाय घर ले आए, जहां बृहस्पतिवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। मनोज रुद्रपुर में सिडकुल में काम करता था। ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को मुआवजे की मांग की है।