चंपावत। जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल (डीएच) के अधिकांश शौचालयों में भी ताले लटक गए हैं। 16 शौचालयों में से 12 बंद कर दिए गए हैं। इसकी वजह है अस्पताल में पानी की कमी।
जिला अस्पताल में गर्मियों के इस सीजन में पानी की जबर्दस्त किल्लत परेशानी का सबब बनी हुई है। मार्च महीने से डीएच के नलों से पानी यदा-कदा ही मिला है। पानी की कमी की मार अस्पताल के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ रही है। मरीजों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे बुरा असर अस्पताल की साफ-सफाई पर पड़ा है। इमरजेंसी और ओपीडी में कुल मिलाकर 16 शौचालय हैं, मगर इनमें से 12 शौचालयों पर कई दिनों से बंद हैं।
जिला अस्पताल को पांच हजार लीटर पानी की हर रोज जरूरत है। मगर काफी वक्त से अस्पताल में पानी की एक बूंद नहीं टपकी है। पानी की कमी से शौचालय में गंदगी हो रही है। इससे बचने के लिए चार को छोड़ शेष शौचालयों को बंद किया गया है। पानी की कमी का असर मरीज, तिमारदारों और स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ पर पड़ रहा है। जल संस्थान से व्यवस्था में सुधार के लिए आग्रह किया गया है।
- डॉ. आरपी खंडूरी, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल, चंपावत।
जल संस्थान रोज दे रहा एक टैंकर पानी
जल संस्थान के कनिष्ठ अभियंता किशोर पंत का कहना है कि स्रोत में पानी की कमी से अस्पताल में पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ा है। पिछले सप्ताह अधिशासी अभियंता अशोक कुमार और जल संस्थान की टीम ने स्रोत का मुआयना भी किया था। वैकल्पिक उपाय के रूप में संस्थान रोजाना एक टैंकर (तीन हजार लीटर) पानी अस्पताल को दे रहा है।