चंपावत। 15 महीने के इंतजार के बाद आखिरकार राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में गैस चूल्हे मिल गए। इसके साथ ही अब जिले के अधिकतर स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के खाने के लिए लकड़ी के चूल्हे से निजात मिल जाएगी।
भूख के चलते स्कूल से दूरी बनाए रखने वालों का रुख स्कूल की ओर करने के लिए एमडीएम योजना शुरू की गई थी। इस वक्त जिले में पहली से आठवीं तक के 690 सरकारी स्कूलों के 24376 छात्र-छात्राएं योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। इसके लिए 1060 भोजन माताएं सेवा दे रही हैं। फरवरी तक यहां महज 70 स्कूलों में ही गैस चूल्हे से खाना बन रहा था। शेष 620 स्कूलों ने भी नवंबर 2017 में गैस के कनेक्शन ले लिए थे लेकिन लंबे समय तक स्कूलों को चूल्हे उपलब्ध नहीं हो सके।
अब एनजीओ हंस फाउंडेशन ने 411 स्कूलों को गैस के चूल्हे दे दिए हैं। जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण ने बताया कि शेष 209 स्कूलों को भी जल्द ही चूल्हे उपलब्ध करा दिए जाएंगे। मनीष, जिला समन्वयक, मध्याह्न भोजन योजना, चंपावत ने बताया कि हंस फाउंडेशन की ओर से भेजे गए 411 गैस चूल्हे मिल गए हैं।
अब जिले के 481 स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना का खाना गैस चूल्हे से बन सकेगा। पाटी क्षेत्र सहित कई जगह के स्कूलों में इन चूल्हों को बांट दिया गया है।
भोजन माताओं को मिलेगी समस्याओं से निजात
लकड़ी के चूल्हे पर लकड़ी के जुगाड़ के साथ कई तरह की दिक्कतें भी होती हैं। वहीं भोजन माताओं को धुएं से समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गैस चूल्हे पर खाना बनाने से उन्हें सुविधा मिलेगी और सांस संबंधी समस्याओं से निजात मिलेगी।