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जरूरत थी 3.47 करोड़ की, मिले महज 98.5 लाख रुपये

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चंपावत। वैसे तो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की खूब गूंज है मगर चंपावत जिले की 497 बेटियां इस पर सवाल उठा रही हैं। इन्हें दो साल बाद भी कन्या धन योजना की राशि नहीं मिली है। शासन ने इसके लिए धन तो भेजा मगर वह नाकाफी था। 694 छात्राओं के लिए 3.47 करोड़ रुपये की जरूरत थी, लेकिन शासन से महज 98.50 लाख रुपये मिला, जो कि महज 197 छात्राओं को ही दिया जा सका।
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चंपावत में 2016 में इंटरमीडिएट पास करने वाली बेटियों को गौरा देवी कन्या धन योजना की रकम आजतक नहीं मिल सकी है। इसके अंतर्गत एपीएल वर्ग को छोड़ शेष सभी छात्राओं को 50 हजार रुपये की सावधि जमा (एफडी) दी जाती है। जिले में 2016 में इंटर कर चुकी 1283 छात्राओं में से 589 छात्राओं को पिछले साल योजना की धनराशि दी गई।

मार्च में शासन ने 98.50 लाख रुपये अवमुक्त किए, लेकिन ये धनराशि मात्र 197 छात्राओं के लिए ही हो सकी। अब भी 497 छात्राओं को गौरा देवी कन्या धन योजना की धनराशि का इंतजार है। इसके लिए छात्राएं, उनके अभिभावक जिला समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अभिभावकों का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। साथ ही धन मिलने में देरी से इन छात्राओं की एफडी के पूरा होने में भी अधिक समय लगेगा।
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गौरा देवी कन्या धन योजना मद में मार्च में 98.50 लाख रुपये अवमुक्त हुए थे। इस रकम को 197 छात्राओं को दे दिया गया। शेष 497 छात्राओं के लिए 2.485 करोड़ रुपये की जरूरत है। रकम मिलने के बाद ही धन दिया जा सकेगा।
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- आरसी तिवारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, चंपावत।
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