चंपावत। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) का आदेश स्वास्थ्य विभाग के लिए कोई खास मायने नहीं रखता है। संबद्धीकरण निरस्त कर एक डॉक्टर को मूल अस्पताल में भेजने के सीएमओ का आदेश 55 दिनों बाद भी अमल में नहीं आ सका है। आदेश के क्रियान्वित नहीं होने से लधिया घाटी के टांण राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसएडी) में डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पा रही है। जबकि यहां पहले से ही फार्मेसिस्ट का पद भी खाली है।
सीएमओ डॉ.एमएस बोहरा ने 6 जुलाई को लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के चिकित्साधीक्षक का जिम्मा संभालने वाले डॉ.मंजीत सिंह को उनके मूल तैनाती स्थल टांण एसएडी में योगदान देने के आदेश दिए थे। साथ ही वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.वीके जोशी को चिकित्साधीक्षक का दायित्व दिया गया था। डॉ.जोशी ने तो एमएस की जिम्मेदारी संभाल ली, मगर 55 दिन बीतने के बावजूद डॉ.मंजीत सिंह लोहाघाट से 86 किलोमीटर दूर टांण अस्पताल तक नहीं पहुंच सके हैं। उन्हें अभी तक सीएचसी लोहाघाट से कार्यमुक्त नहीं किया जा सका है। जबकि टांण अस्पताल बीते कई महीने से एकमात्र वार्डब्वाय के भरोसे चल रहा है। डॉक्टर न होने से यहां मरीजों के लिए यह अस्पताल सफेद हाथी बन गया है। इधर पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.आभाष सिंह का कहना है कि डॉ.मंजीत सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने से संबंधित पत्र भेजा है।
कोट
अस्पताल में डॉक्टरों की खासी कमी है। 13 के सापेक्ष मात्र 7 डॉक्टर हैं। डॉक्टरों की कमी की वजह से डॉक्टर मंजीत सिंह को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। यहां स्थानांतरित दो डॉक्टरों के अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें टांण के लिए रिलीव कर दिया जाएगा।
डा.वीके जोशी,
चिकित्साधीक्षक, सीएचसी, लोहाघाट।
कोट
लोहाघाट संबद्ध किए गए चिकित्साधीक्षक डा.मंजीत सिंह को उनके मूल तैनाती स्थल टांण राजकीय एलोपैथिक अस्पताल वापस भेजे जाने के 6 जुलाई को आदेश दिए गए थे। कार्यभार ग्रहण नहीं करने की दशा में संबंधित डॉक्टर को तलब किया जाएगा।
डॉ.एमएस बोहरा मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।