जिला अस्पताल में बीमार बच्चा ।
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एक बार फिर आपात सेवा की खामी ने दो साल के एक बीमार की जान को सांसत में डाल दिया था। सांस की दिक्कत से परेशान बच्चे को रेफर किया गया, तो 108 सेवा उपलब्ध नहीं हुई। दो घंटे के इंतजार के बाद बच्चे को खुशियों की सवारी (केकेएस) से हायर सेंटर ले जाया गया। एक महीने में 108 सेवा के झटका देने का यह सातवां मामला है।
मंगलवार को यहां से 10 किलोमीटर दूर बनलेख गांव के भुवन (2 वर्ष) पुत्र दिनेश चंद्र की तबियत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाया गया। तेज बुखार से पीड़ित बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सिंह और डॉ. इंद्रजीत पांडेय ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर किया। परिजनों ने आपात सेवा 108 को कॉल किया, तो वाहन ने तकनीकी खामी का हवाला देते हुए हल्द्वानी जाने से इंकार कर दिया।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने हस्तक्षेप कर खुशियों की सवारी के जरिए बच्चे को हल्द्वानी भिजवाया। केकेएस में अस्पताल से आक्सीजन सिलिंडर लगाया गया। बहरहाल इस कवायद में करीब दो घंटे बर्बाद हो गए।
शासन से मिले धन को आपात चिकित्सा 108 सेवा वेतन मद में खर्च कर रहा है। जिस कारण तेल और अन्य दिक्कतें आ रही है। अलबत्ता अब शासन ने 75 प्रतिशत मद तेल में और 25 प्रतिशत धन मरम्मत में खर्च करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ.आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।