प्रथम दिन देवी के प्रथम स्वरूप शैलपूत्री की पूजाकर अपने गांव की मंडोली व थानों में लोगों ने पूजा अर्पित की। देवी को ऋतुफलों व अनाजों का भोग लगाया। भलसों के देवराणी मंदिर, जुलगढ़ के हुलका मंदिर में ग्रामीणों ने पूजा की। आदिबदरी के मंदिर व चांदपुर गढ़ी के दक्षिण काली, राजराजेश्वरी के मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। आदिबदरी के पुजारी चक्रधर थपलियाल ने कहा कि नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण माता रानी को शैलपुत्री कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करने से मान-सम्मान में वृद्धि व उत्तम सेहत प्राप्त होती है। मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र अति प्रिय हैं। इस लिए सफेद वस्त्र चढ़ाना शुभ होता है।
मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़
कर्णप्रयाग। देवाल, थराली, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, सिमली, लंगासू, गौचर, आदिबदरी, गैरसैंण, नौटी व नंदासैंण में नवरात्र के मौके पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की और भगवान से धनधान्य का आशीर्वाद मांगा। लोगों ने अपने घरों में भी नवरात्र पाठ शुरू कर दिए हैं। जौ की हरियाली डालकर पूजा-अर्चना की जा रही है।