विस्थापन और मुआवजे की मांग को लेकर थराली विकास खंड के आपदा प्रभावित त्यूंला, भ्याड़ी और छपाली के प्रभावितों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कलेक्ट्रेट में जिला योजना की बैठक लेने पहुंचे प्रभारी मंत्री प्रीतम सिंह पंवार को भी प्रभावितों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।
सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जैसे ही जिला योजना की बैठक शुरू होते ही प्रभावित ग्रामीण सभागार की ओर नारेबाजी करते हुए बढ़े, जिसे देखते हुए यहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन महिलाओं के आक्रोश के चलते धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
जिला पंचायत सदस्य मनोज भंडारी ने कहा कि आपदा से त्रस्त त्यूंला, भ्याड़ी और छपाली गांव वर्ष 1992 से विस्थापन की सूची में शामिल किए गए हैं, लेकिन आज तक भी गांवों का विस्थापन नहीं किया गया। बढ़ते विरोध को देख प्रभारी मंत्री ने स्वयं बाहर आकर प्रभावितों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय में वार्ता की। मंत्री ने डीएम को शीघ्र प्रभावित गांवों में जांच कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरित करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर प्रताप सिंह, गोपाल सिंह, खिलाप सिंह, दमयंती देवी, सुजान ङ्क्षसह, नारायण सिंह, जोत सिंह, वीरेंद्र सिंह, वलवन्त सिंह भजन सिंह त्रिलोक सिंह, भगत सिंह, देवकी देवी, लक्ष्मी देवी, अषाढी देवी, रजनी देवी, मधुली देवी, कमला देवी, अनीता देवी, मुन्नी देवी, उर्मिला देवी, इरा देवी, गीता देवी और बसंती देवी आदि मौजूद थे।
महिलाओं को रोकने के लिए नहीं थी महिला पुलिस
गोपेश्वर। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शनकारी महिलाओं को रोकने के लिए एक भी महिला पुलिस कर्मी तैनात नहीं थी। यहां पुरुष पुलिस कर्मियों की महिलाओं से धक्का-मुक्की हुई। जब जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी जोशी और भागीरथी कुंजवाल ने पुलिस की इस चूक पर सवाल उठाए तो पुलिस ने आनन-फानन में दो महिला पुलिस को मौके पर बुलाया गया, लेकिन तब मामला शांत हो चुका था। इधर, पुलिस अधीक्षक प्रीति प्रियदर्शिनी का कहना है कि जिले में महिला पुलिस कर्मियों की कमी है। जिसके चलते अचानक हुए प्रदर्शन को रोकने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने ही सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम उठाए।