बारिश बनी आफत, बधाणी में मकानों से निकल रहा बरसात का पानी
पांच वाहन मलबे में दबे, घरों में पानी से सामान हुआ खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। मंगलवार रात को हुई बारिश नगर में आफत बनकर बरसी। बारिश से जहां देवतोली में दो मकानों के आंगन भू-धंसाव से क्षतिग्रस्त हो गए वहीं चार से अधिक मकानों में दरारें आ गईं। जबकि बधाणी गांव में चार मकानों के अंदर से बरसात का पानी निकल रहा है। वहीं नगर में खड़े पांच वाहन भी मलबे में दब गए।
बारिश के कारण नगर के जखेड़, घटगाड़, और सुभाषनगर का गदेरा उफान पर आ गया। सुभाषनगर में एंड के जंगलों से आने वाले उफनते गदेरे में एक ट्राॅला मलबे में दब गया जबकि अपर बाजार पार्किंग में खड़े तीन से अधिक वाहन भी मलबे में दब गए। अपर बाजार में सड़क का पुश्ता दरकने से मलबा एक मकान में जा घुसा जबकि बधाणी में घनानंद वैष्णव, भगत सिंह, नत्था सिंह, अर्जुन सिंह आदि के घरों से बरसाती पानी निकलने लगा। पानी से घरों में रखा सामान खराब हो गया। वहीं देवतोली में अरुण सेमवाल और श्रीधर सेमवाल के आंगन धंस गए और दिवस्पति सेमवाल सहित आसपास के चार से अधिक मकानों में दरारें आ गईं। वहीं घटगाड़ में खड़ी एक स्कूटी उफनते गदेरे में बह गई जिसे ग्रामीणों ने बाद में निकाला। प्रभावितों ने क्षेत्र का जल्द निरीक्षण कर सुरक्षा कार्य करने की मांग की।
राशन और जरूरी सामान के लिए चल रहे 13 किमी पैदल
थराली। ढाढरबगड़ में पुलिया बहने से सोल पट्टी के सबसे बड़े गांव रतगांव का आवागमन ठप पड़ा है। रतगांव में लगभग तीन हजार लोग रहते हैं। यहां के ग्रामीण 13 किमी पैदल चल जंगल और चट्टानी मार्ग से होते हुए राशन और अन्य जरूरी सामान जुटाने के लिए थराली पहुंच रहे हैं।
ग्राम प्रधान महिपाल सिंह, सुजान सिंह, पृथ्वी सिंह, गंगा सिंह आदि ने बताया कि ग्रामीण दुर्गम रास्ते और कठिन चढ़ाई पार कर 13 किमी पैदल चलकर कुराड़ के पवें स्थान पर पहुंच रहे हैं। जंगल के रास्ते में जंगली जानवरों का भी डर बना है। इसके बाद 19 किमी टैक्सी से सफर कर दो सौ रुपये किराया देकर थराली पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार से राशन लाने में ग्रामीणों को दस से 12 घंटे लग रहे हैं। ग्रामीण सुबह 6 बजे रतगांव से थराली जा रहे हैं और शाम को 6 बजे लौट रहे हैं। वहीं लोनिवि के ईई दिनेश मोहन गुप्ता का कहना है कि रतगांव के लिए बुरसोल और गुमड़ से सड़क सर्वे किया है लेकिन ग्रामीण भूमि देने को तैयार नहीं है। वहीं ढाढरबगड़ में नदी का स्पान बहुत बढ़ गया है लिहाजा यहां बैली ब्रिज नहीं लग सकता। संवाद