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बदरीनाथ की पूजा को लेकर डिमरी पंचायत में बढ़ता जा रहा अंतर्कलह

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बदरीनाथ धाम की प्रात:कालीन पूजा पर डिमरी पंचायत में अंतर्कलह बढ़ता ही जा रहा है। डिमरी पंचायत का एक पक्ष देवस्थानम बोर्ड का समर्थन कर रहा है तो दूसरा पक्ष बोर्ड के खिलाफ है। डिमरी पंचायत के पदाधिकारियों का कहना है कि बदरीनाथ धाम में देवस्थानम बोर्ड के अधिकारियों के मनमाने रवैए से यह विवाद खड़ा हुआ है।
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बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को विधि-विधान से खोल दिए गए थे। कोरोना संक्रमण के चलते तीर्थयात्रा स्थगित है, लेकिन बदरीनाथ जी की नित्य पूजाएं चल रही हैं। बदरीनाथ की पूजा हर वर्ष सुबह साढ़े चार बजे से शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार देवस्थानम बोर्ड ने शुरुआत में ही पूजा का समय बदलकर सुबह 7 बजे कर दिया। इसके पीछे बामणी गांव से गाय का दूध देरी से प्राप्त होने का तर्क दिया गया। डिमरी पंचायत ने इसका पुरजोर विरोध किया। मामला बढ़ते देख 30 मई से पुन: बदरीनाथ की अभिषेक पूजा सुबह साढ़े चार बजे से ही होने लगी। बदरीनाथ की पूजा का समय तो पूर्व की भांति हो गया, लेकिन इस पर डिमरी पंचायत दो धड़ों में बंट गई। डिमरी पंचायत के पंकज डिमरी, राजेंद्र डिमरी, ज्योतिष डिमरी, दिनेश डिमरी और नरेंद्र डिमरी ने बदरीनाथ धाम में चल रही पूजा और बदली परिस्थितियों में हुई पूजा को शास्त्र सम्मत बताया। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ में किसी भी परंपरा को तोड़ा नहीं गया है। इधर, डिमरी पंचायत के अध्यक्ष राकेश कुमार डिमरी और कार्यकारी अध्यक्ष विनोद डिमरी ने कहा कि बोर्ड की ओर से बदरीनाथ की पूजा को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। यदि धाम में चल रही प्रात:कालीन पूजा शास्त्रसम्मत थी तो दोबारा पूजा का समय क्यों बदला गया।
डिमरी पंचायत में पहली बार सामने आया अंतर्कलह
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम की पूजा प्रक्रियाओं में डिमरी पंचायत की मुख्य भूमिका है। धाम में रावल (मुख्य पुजारी) के साथ बितला बड़वा (बड़े आचार्य) के रूप में भी डिमरी आचार्य रहते हैं। इसके साथ ही लक्ष्मी मंदिर, भोग-प्रसाद, चरणामृत, कामधेनु, हवन, नारद शिला, सूर्य कुंड, गौरी कुंड व अन्य बाहरी पूजाएं भी डिमरी पंचायत के जिम्मे रही हैं। आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से यह व्यवस्था शुरू कराई गई थी, जो आज भी अनवरत रूप से चल रही है। डिमरी पंचायत में अंतर्कलह के पीछे डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत में प्रतिनिधित्व को कारण माना जा रहा है। यह अंतर्कलह पहली बार ही सामने आया है।
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