जल विद्युत परियोजना से हाट गांव के मंदिरों को भी खतरा
परियोजना से खतरे में आ जाएगा शंकराचार्य की ओर से स्थापित लक्ष्मी नारायण मंदिर
ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
इंटेक ने गांव और मंदिर को पुरातत्व सर्वेक्षण की सूची में शामिल करने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। 444 मेगावाट वाली विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना से एतिहासिक गांव हाट (छोटी काशी) और यहां आठवीं सदी में बने मंदिरों को भी खतरा पैदा हो गया है। इंटेक ने इस मामले में ग्रामीणों का समर्थन किया है। इंटेक ने इसके बारे में परियोजना को वित्तपोषित करने वाले विश्व बैंक और परियोजना की निर्माणदायी संस्था टीएचडीसी को पत्र लिखा है। कहा कि मंदिर और गांव पुरातत्व सर्वे की सूची में होने चाहिए। वहीं ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
हाट गांव के ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे ज्ञापन में कहा कि उनका गांव प्राचीन मंदिरों का स्थल है। आठवीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने यहां पर लक्ष्मी नारायण मंदिर के साथ ही अन्य छोटे मंदिरों के समूह को स्थापित किया था, जिसके चलते इसे छोटी काशी भी कहा जाता है, लेकिन उनके गांव के पास से टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) की ओर से परियोजना बनाई जा रही है। लक्ष्मीनारायण मंदिर के गर्भगृह के ठीक ऊपर कंपनी ने डंपिंग जोन बनाया है। इसकी दीवार कभी भी गिर सकती है, जिससे मंदिर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
उधर, इंटेक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) के आर्किटेक्चरल हेरिटैज डिविजन की प्रधान निदेशक दिव्य गुप्ता ने इस संबंध में विश्व बैंक और टीएचडीसी को पत्र भेजा। कहा कि प्राचीन परिसर (मंदिर स्थलों और अवशेषों सहित) गांव की बस्ती को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षित (एएसआई) की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र में परियोजना स्थल पर एएसआई की 2009 में जारी की गई रिपोर्ट का भी हवाला दिया है, जिसमें कहा है कि लक्ष्मी नारायण मंदिर जो 9-10 शताब्दी पूर्व का है, परियोजना के प्रभावित क्षेत्र में स्थित है।
फोटो
ग्रामीणों ने विश्व बैंक के अधिकारियों को सुनाई खरी-खरी
पीपलकोटी। इसी मामले को लेकर विश्व बैंक के अधिकारियों ने हाट गांव के ग्रामीणों के साथ ऑनलाइन बैठक की, जिसमें ग्रामीणों ने अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई।
ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल ने बताया कि हमने अधिकारियों से पूछा कि जब उनको परियोजना स्थल के एतिहासिक महत्व की जानकारी ही नहीं थी तो कैसे परियोजना के लिए ऋण मंजूर कर दिया। एएसआई की रिपोर्ट को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया। हमारे गांव में प्राचीन काल के करीब 20 छोटे मंदिरों का समूह है। हाल ही में एक ग्रामीण के घर पर करीब 1000 साल पुरानी तांबे की प्लेट मिली है, जो इस गांव के एतिहासिक होने का पुख्ता प्रमाण है। इसके बावजूद हमारे गांव को डंपिंग जोन के लिए चुना गया है। विश्व बैंक के अधिकारियों के फरवरी या मार्च में गांव आने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों ने कहा कि जब हमारा गांव बर्बाद हो जाएगा तब यहां आकर क्या करेंगे। उसके बाद विश्व बैंक के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द टीएचडीसी के अधिकारियों के साथ इस मामले में बैठक कर ग्रामीणों से भी मुलाकात करेंगे। संवाद