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Uttarakhand: सचिवालय अधिकारी बनकर की लाखों की ठगी, कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा

Thu, 11 Jan 2024 05:33 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली

सार

मृतक दिलवर सिंह नेगी के भाई देवेंद्र सिंह ने थाना पैठाणी में 23 जुलाई 2020 को एक तहरीर सौंपी थी। उन्होंने बताया था कि एक व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर फोन किया और स्वयं को सचिवालय में अधिकारी बताया।
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जेल - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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दिल्ली दंगों में जान गंवाने वाले दिलवर के परिजनों से सचिवालय अधिकारी बन 3 लाख 25 हजार की ठगी करने वाले दोषी को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। साथ ही दोषी पर 5 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार कर जिला कारागार खांड्यूसैंण भेजने का आदेश दिया है।

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मृतक दिलवर सिंह नेगी के भाई देवेंद्र सिंह ने थाना पैठाणी में 23 जुलाई 2020 को एक तहरीर सौंपी थी। उन्होंने बताया था कि एक व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर फोन किया और स्वयं को सचिवालय में अधिकारी बताया। कहा कि उच्च अधिकारियों ने परिवार की मदद की बात कही है। इस दौरान भाई की मौत के बाद देश व प्रदेश के कई हिस्सों से लोग आर्थिक मदद कर रहे थे। इसलिए कोई संशय नहीं हुआ।

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बताया था कि उक्त व्यक्ति ने शैक्षणिक, स्थायी निवास, जाति प्रमाणपत्र, आधार कार्ड की छाया प्रति मांगी और दो कैंसिल चेक भी मांगे। परिवार ने व्यक्ति को कैंसिल चेक दे दिए लेकिन उन चेक की मदद से आरोपी ने 30 जून 2020 को 1 लाख 25 हजार और दूसरी 2 लाख की धनराशि अपने खाते में ट्रांसफर कर दी। इसकी शिकायत पुलिस को सौंपी गई। थाना पैठाणी पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, लोक सेवा अधिकारी बनकर जालसाजी से ठगी करने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को 9 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया था। आरोपी को 6 अप्रैल 2021 को जमानत मिल गई थी।
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तब से वह जमानत पर ही था। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता आशीष जदली ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी मौ. याकूब की अदालत ने वीरेंद्र सिंह निवासी ग्राम सिरणा, जिला पौड़ी गढ़वाल को लोक सेवा अधिकारी बनकर जालसाजी से ठगी करने का दोषी पाया और तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 5 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया।

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