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रात भर आग में जले थराली, ऊंग, ढूंगाखोली और सगवाड़ा के जंगल

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थराली, ऊंग, ढूंगाखोली और सगवाड़ा के जंगल रात भर जलते रहे। मंगलवार को यह आग तहसील मुख्यालय के पास पहुंची और खुद ही बुझ गई। ऐसा पहली बार है जब दिसंबर और जनवरी में ही चीड़ के जंगल जल गए। थराली के आस-पास लगी आग से जंगली जानवर रात में बस्ती की तरफ आ रहे हैं।
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जैल सिंह, हरी प्रसाद, राकेश सिंह, पुष्कर सिंह आदि ने कहा कि रविवार रात को जाड़ापानी, लीसा डीपो और चिडंगा के जंगलों में आग भड़क गई थी। दो दिन तक जंगल आग में भड़कते रहे, जिससे कई हेक्टेयर वन संपदा नष्ट हो गई। मंगलवार को तहसील मुख्यालय तक पहुंचने के बाद आग खुद ही बुझ गई।
आग के कारण जंगलों से जानवर आबादी क्षेत्र में आने लगे हैं। सोमवार रात को तहसील मुख्यालय की आवासीय कालोनी के पास रात में एक गुलदार भी दिखाई दिया। उपजिलाधिकारी थराली ने वन विभाग को इसकी सूचना दी और हो हल्ला कर गुलदार को बस्ती से भगाया। वन क्षेत्राधिकारी त्रिलोक सिंह बिष्ट का कहना है कि आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जिसने भी आग लगाई होगी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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