18 किमी की पैदल दूरी तय कर उत्सव डोली पहुंची शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर
विधि-विधान से गोपीनाथ मंदिर में विराजमान की गई डोली
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट बृहस्पतिवार को ब्रह्ममुहूर्त में सुबह छह बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। 18 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करने के बाद देर शाम को रुद्रनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर पहुंची। इसके बाद उत्सव डोली को गोपीनाथ मंदिर में विराजमान कर दिया गया। रुद्रनाथ मंदिर में स्थित शिलामूर्ति को बुखला (हिमालयी पुष्पगुच्छ) के फूलों से समाधि दी गई। मंदिर के कपाट बंद होने पर सैकड़ों श्रद्धालु रुद्रनाथ मंदिर पहुंचे थे।
बृहस्पवितार को पुजारी वेदप्रकाश महादेव भट्ट ने तड़के ही रुद्रनाथ का अभिषेक किया और नित्य पूजा-अर्चना की। सुबह पांच बजे आरती के बाद रुद्रनाथ की शिलामूर्ति को चारों ओर से बुखला के फूलों से समाधि दी गई। सुबह ठीक छह बजे मंदिर के कपाट शीतकाल में छह माह के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान जय रुद्रनाथ भगवान.. के उदघोष के साथ रुद्रनाथ की उत्सव डोली रवाना हुई और बुग्यालों के बीच से होते हुए 18 किमी की दूरी तय कर गंगोलगांव पहुंची। यहां से भक्तगणों के साथ डोली गोपीनाथ मंदिर में पहुंची। यहां गोपेश्वर गांव के लोगों ने रुद्रनाथ को अर्घ्य लगाया। इसके बाद छह माह के लिए रुद्रनाथ की प्रतिमा को गोपीनाथ मंदिर में विराजमान कर दिया गया।
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80 हजार श्रद्धालुओं ने किए रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन
गोपेश्वर। इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का रैला उमड़ पड़ा। शुरुआत से ही रुद्रनाथ के दर्शनों को श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इस बार करीब 80 हजार श्रद्धालुओं ने रुद्रनाथ के मुख के दर्शन किए। जबकि गत वर्ष 72 हजार श्रद्धालु रुद्रनाथ के दर्शनों को पहुंचे थे। इस वर्ष रुद्रनाथ में एक माह का महारुद्राभिषेक अनुष्ठान भी आयोजित किया गया। संवाद