ब्लॉक का भंगोटा-कुशदेव मार्ग छह माह से बंद होने के कारण कुश गांव के 200 से अधिक लोगों को छह किलोमीटर पैदल चलकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। सड़क पर वाहन न चलने से ग्रामीणों को अपनी फसलें घाटे में बेचनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों ने डीएम से मार्ग पर यातायात बहाल करने की मांग की। नारायणबगड़ क्षेत्र के संजय कंडारी, जयबीर सिंह, धर्म सिंह ने बताया कि भंगोटा गदेरे से कुश गांव के लिए दो साल पहले तीन किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया। इस साल बरसात शुरू होते ही यह सड़क कई स्थानों पर ध्वस्त हो गई और तब से यह बंद पड़ी है। यहां पैदल चलने तक का रास्ता नहीं बचा है। कुश गांव से ग्रामीणों को अब छह किमी की पैदल दूरी तय कर लवकुश महादेव मंदिर पहुंच रहे हैं। साथ ही अन्य जगहों पर पहुंच रहे हैं। कहा कि, कुश गांव में नकदी फसलों, रामदाना व पहाड़ी दालों का उत्पादन बहुतायत मात्रा में होता है। ऐसे में सड़क बंद रहने से ग्रामीणों को अपनी फसलें कम दामों पर बचनी पड़ीं। चौलाई 65 रुपये किलो के बजाय 40, राजमा, उड़द व गहत 150 के बजाय 100 रुपये, भंगजीरा 400 के बजाय 100 रुपये किलो में बेचनी पड़ीं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सड़क पर यातायात बहाल होता तो उनको खतों में उगाई गई दाल आदि फसलों का अच्छा रेट मिलता।
कहा कि तहसील दिवस पर ग्राम प्रधान भूपेंद्र मेहरा ने सड़क अतिशीघ्र खोलने की मांग की थी लेकिन अभी तक इसे खोला नहीं जा सका। वहीं, लोनिवि के अवर अभियंता आशीष चौहान ने बताया कि क्षतिग्रस्त मार्ग का आकलन कर इस्टीमेट तैयार कर दिया गया है। शीघ्र निविदाएं आमंत्रित कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।