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गैरसैंण राजधानी के लिए रणनीति बननी शुरू

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गैरसैंण के भराड़ीसैंण में तीन मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र को लेकर फिर से लोगों में स्थायी राजधानी की उम्मीद जग गई है। गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति स्थायी राजधानी के लिए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति में भी जुट गई है।
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भराड़ीसैंण में पांच बार हो चुके सत्रों पर गौर करें तो जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने में भाजपा और कांग्रेस संवेदनशील नहीं रही। बारी-बारी से राज्य में शासन के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाईं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि गैरसैंण में होने वाला यह बजट सत्र सरकार के सामने कई कठिन चुनौतियों को लेकर आएगा। यदि सरकार जनता की भावनाओं पर खरा नहीं उतर पाती तो 2022 के विधानसभा चुनावों में भी इसका असर पड़ेगा। गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण बिष्ट व केंद्रीय अध्यक्ष चारु तिवारी का कहना है वे जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को राजधानी बनाकर ही दम लेंगे। इस बार बजट सत्र के दौरान सरकार को उन 38 आंदोलनकारियों को भी जवाब देना होगा, जिन पर पिछले विधानसभा सत्र में राजधानी की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान मुकदमे दर्ज हुए थे।
ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की, बनाई नहीं
वर्ष 2017 में भाजपा ने सरकार बनाते ही गैरसैंण के विकास के लिए कई वायदे किए। यहां तक कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा भी कर दी थी, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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दून का एससीईआरटी ऑफिस गैरसैंण होगा शिफ्ट
सूत्रों की माने तो उत्तराखंड का एससीईआरटी दफ्तर देहरादून से गैरसैंण लाने की तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग से इसे मंजूरी भी मिल चुकी है। लेकिन गैरसैंण में सुविधाओं के अभाव के चलते मामला लंबित है।
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