बृहस्पतिवार रात डेढ़ घंटे हुई तेज बारिश के कारण सुनाली और जैंटी गांव में अफरा-तफरी मची रही। खतरे की आशंका से दोनों गांवों के लोग घरों से बाहर निकल आए और रातभर बारिश थमने का इंतजार करते रहे।
शुक्रवार सुबह बारिश बंद होने पर ही जैंटी के ग्रामीण घरों को लौटे जबकि सुनाली के 40 से अधिक परिवार शुक्रवार को गांव से दो किमी दूर छानियों में शिफ्ट हो गए।
सुनाली और जैंटी में जुलाई 2013 में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था। यहां करीब 50 से अधिक मकान आंशिक और पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे। सुनाली के लक्ष्मण सिंह और क्षेत्र पंचायत सदस्य दिग्पाल सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात को पौने नौ बजे गड़गड़ाहट के साथ तेज बारिश हुई।
कुछ देर बाद ही सुनाली गदेरा उफान पर आ गया। जुलाई 2013 के मंजर से भयभीत ग्रामीण घरों को छोड़कर बाहर निकल आए। गदेरे के उफान से कई खेत मलबे में तब्दील हो गए।
वहीं सुनाली के ठीक नीचे बसे जैंटी-भटकोटी गांव में रातभर बारिश के दौरान ग्रामीण घरों से बाहर रहे। गांव के शिव सिंह नेगी ने बताया कि बारिश से जहां दस से अधिक मकानों में दरारें आ चुकी हैं, वहीं सैकड़ों नाली कृषि भूमि मलबे से पट गई है। गांव की पेयजल लाइन और पैदल पुल भी बह गई है।