वर्ष 2011 में तत्कालीन राज्य सरकार ने सैफ गेम्स के दौरान औली को विश्व स्तर पर पहचान देने के लिए भरसक प्रयास करने का ऐलान किया था, लेकिन गेम्स निपटने के बाद औली की सुध तक नहीं ली गई।
नगर पालिका अध्यक्ष रोहिणी रावत, पूर्व जिला पंचायत सदस्य भरत कुंवर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश डिमरी और अंतरराष्ट्रीय स्कीयर विवेक पंवार का कहना है कि वर्ष 2011 में औली में सैफ गेम्स के दौरान दो करोड़ 56 लाख रुपये खर्च कर आइस स्केटिंग रिंग बनाने का कार्य शुरू हुआ, लेकिन आज तक कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है।
अब स्थानीय स्कीइंग खिलाड़ी और जनप्रतिनिधि औली में आइस स्केटिंग रिंग निर्माण की मांग जोर-शोर से उठा रहे हैं।
उत्तराखंड विंटर गेम ऐसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस पांगती का कहना है कि सामान्य आइस स्केटिंग रिंग की लंबाई 40 मीटर होनी चाहिए और औली में 140 मीटर लंबी स्केटिंग रिंग बनाने की पर्याप्त जगह है। इसके बाद भी यहां आइस स्केटिंग रिंग का निर्माण नहीं हो पाया।
इंसेट
स्नो गन और स्नो मेकिंग मशीनें खराब
जोशीमठ। सैफ गेम्स के दौरान औली में कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए राज्य सरकार ने स्नो गन और स्नो मेकिंग मशीन स्थापित की थी।
यहां स्लोप के दोनों ओर छह करोड़ 50 लाख की लागत से 28 स्नो गन और चार स्नो मोबाइल स्थापित किए गए, लेकिन आज ये करोड़ों की मशीनें रख-रखाव के अभाव में जंक खा रही हैं।
इन उपकरणों की खरीद के लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव राकेश शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी। मशीनों की खरीद आस्ट्रिया से की गई थी।
जीएमवीएन के अधिकारियों को इन मशीनों के संरक्षण और सुधारीकरण के लिए योजना तैयार करने के लिए कहा है। यहां स्थापित मशीनों की नियमित देखरेख के लिए भी जीएमवीएन के अधिकारियों को कहा गया है। - सीएस नपलच्याल, गढ़वाल आयुक्त।