चमोली जनपद की विषम परिस्थितियों वाली निजमुला घाटी के 13 गांवों की करीब 5000 की आबादी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। क्षेत्र में संचार, सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं अभाव बना है। घाटी के दूरस्थ गांव पाणा और ईराणी के लिए वर्ष 2015 से निर्माणाधीन सड़क का काम भी पिछले डेढ़ सालों से आधा- अधूरा पड़ा है।
निजमुला घाटी के ग्रामीण कई बार जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक तक आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन घाटी में सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है। घाटी में निजमुला, पाणा, ईराणी, झींझी, पगना, गौणा, भराली, गाड़ी, ब्यारा आदि गांव हैं। घाटी को जोड़ने वाली एकमात्र बिरही-निजमुला सड़क कई जगहों पर क्षतिग्रस्त है। सड़क पर छह वर्ष पूर्व हुआ डामरीकरण भी पूरी तरह से उखड़ गया है। राजकीय इंटर कॉलेज ईराणी में शिक्षकों का अभाव बना हुआ है। क्षेत्र में स्वास्थ्य उपकेंद्र तो है, लेकिन यहां एएनएम के अलावा कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं है। जिससे ग्रामीणों को छोटी सी बीमारी के इलाज के लिए भी करीब 40 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल गोपेश्वर आना पड़ता है।
प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष मोहन सिंह नेगी ने बताया कि सात साल पूर्व शासन से निजमुला-पाणा-ईराणी सड़क को स्वीकृति मिली, लेकिन आज तक सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। वीर गंगा पर पिछले डेढ़ वर्ष से मोटर पुल का निर्माण कार्य आधा-अधूरा पड़ा है। क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दरकार है। क्षेत्र में प्राकृतिक पेयजल स्रोत तो हैं, लेकिन पेयजल लाइन की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे ग्रामीणों को पानी के इन प्राकृतिक स्रोतों से ही पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ती है।
ग्रामीण दिनेश सिंह, मदन सिंह और सुनील का कहना है कि निजमुला घाटी में सुविधाएं जुटाने की कई बार जिला प्रशासन से मांग की गई। घाटी में आलू, राजमा, चौलाई के साथ ही अन्य सब्जी की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन उत्पादों के विपणन की कोई व्यवस्था नहीं है।