ठंड बढ़ने के साथ ही नीती घाटी के ग्रामीण शीतकालीन प्रवास की ओर लौटने लगे हैं, जिससे घाटी में सन्नाटा पसरने लग गया है। इस महीने के अंत तक घाटी से सभी गांव खाली हो जाएंगे।
भारत-चीन (तिब्बत) सीमा से सटे दर्जनों गांव के लोग गर्मियों के लिए छह महीने इस क्षेत्र में अपने मवेशियों के साथ आते हैं। इस दौरान वे खेती करते हैं। ग्रीष्मकाल में यहां खूब रौनक रहती है, लेकिन जैसे जैसे ठंड बढ़ने लगती है लोग फसलों को समेटकर भेड़ बकरी व गायों को लेकर शीतकाल प्रवास की ओर लौटने लगते हैं। भोटिया जनजाति के लोग ग्रीष्मकाल के दौरान ही गर्म कपड़े भी तैयार कर लेते हैं। ग्रामीणों के अपने मूल स्थानों पर लौटने से नीती, गमशाली, बांपा, फरकिया, कैलाशपुर, कोषा आदि गांवों में सन्नाटा पसरने लग गया है। बांपा निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य ललीत पाल का कहना है कि 25 अक्तूबर तक घाटी के ग्रामीण अपने मूल स्थान पर लौट जाएंगे।