नए साल का जश्न मनाने के लिए चमोली के पर्यटन स्थलों को प्रकृति ने नेमतों से सजाया है। यहां पहाड़ों के बीच से सूर्योदय का मनोरम दृश्य और प्राकृतिक सौंदर्य देखने पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र प्रसिद्ध है। पर्यटन स्थलों से लौटने के बाद पर्यटक मंदिरों में जाकर भगवान से आशीष भी लेते हैं।
IबेनीतालI
मुद्रतल से 2500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बेनीताल कर्णप्रयाग से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर बांस, बुरांश व फनियाट के जंगल हैं। साथ ही करीब 200 मीटर लंबी और 50 मीटर चौड़ी प्राकृतिक झील है। सिमली-बेनीताल मोटर मार्ग से इस झील को देखने के लिए वर्षभर लोग यहां पहुंचते हैं। हालांकि मार्ग संकरा होने के कारण पर्यटकों और स्थानीय लोगों को काफी मुश्किल भी होती है। बेनीताल में नंदा देवी का प्राचीन मंदिर भी है।
Iचांदपुरगढ़ीI
कर्णप्रयाग से करीब 20 किलाेमीटर दूर चांदपुरगढ़ी प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यहां राजवंश की कुलदेवी राजराजेश्वरी का मंदिर है। मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। चांदपुरगढ़ी में स्थित राजमहल के खंडहर आज भी विराजमान हैं। यहां से एक किलामीटर दूर आदिबदरी मंदिर समूह है। नए साल के मौके पर इन दोनों स्थानों पर पर्यटक और स्थानीय लोग भगवान का आशीर्वाद लेने आते हैं। हालांकि इन दोनों स्थलों पर पार्किंग सुविधा न होने से पर्यटकों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं। जिससे जाम लगता है।