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मेरी झांवरी बाजी झमाझम गीत...

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मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में जागर सम्राट बसंती बिष्ट और प्रीतम भरतवाण ने पहाड़ी संस्कृति की अनमोल छटा बिखेरी। प्रीतम ने तिबारी मां बैठीं होली सौंजड्या मेरी..., जा बाडुली सुवा मां रैबार पौंछे ओ... जैसे गीत गाकर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। बसंती बिष्ट के मेरी झांवरी बाजी झमाझम गीत... पर दर्शक पंडाल में झूम उठे। सांस्कृतिक संध्या के दौरान पूरा पंडाल खचाखच भरा रहा।
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गौचर मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, रुद्रप्रयाग के जिला जज हरीश गोयल एवं अल्मोड़ा के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके बाद जैसे ही मंच पर पद्मश्री जागर सम्राट बसंती बिष्ट और प्रीतम भरतवाण पहुंचे तो पंडाल में बैठे सैकड़ों लोगों ने उनका तालियां बजाकर स्वागत किया। उन्होंने देवी के जागर गीत गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। देवताओं का आह्वान करते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। दोनों कलाकारों की स्वर लहरियों और हुड़के व ढोल दमाऊं की थाप पर महिलाओं पर देवता अवतरित हुए। प्रीतम भरतवाण ने सरूली मेरेे जिया लगीगे तेरी रोतेली मुखुड़ी मां..., ज्ञानू माला भीमा कठैत पवाड... जैसे गीत गाकर दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने लोक संस्कृति पर आधारित भजन, जागर, लोकगीत व लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। जागर गायिका बसंती बिष्ट के जागरों ने भी मेले में खूब समा बांधा। उन्होंने गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली के पौराणिक जागर गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर ‘ऊंचि ऊंचि डांडियों में हे कुहेडी ना लगे तू..., मेरी झांवरी बाजि झमा झम..., के साथ ही देव स्तुति पर आधारित कई पौराणिक जागरों की प्रस्तुति देकर लोगों को भाव-विभोर कर दिया। बसंती बिष्ट के जागर सुनने के लिए दूर दराज से लोग मेले में पहुंचे थे। इस मौके पर डीएम स्वाति एस भदौरिया, एसडीएम देवानंद शर्मा, सानिया अजीज, मानवेंद्र बर्तवाल, जगदीश ओलिया, अजय किशोर भंडारी, प्रदीप चौहान, सुनील पंवार, महिपाल नेगी, योगेश धस्माना और राकेश कुमार पल्लव आदि मौजूद थे।
संगति मचि हाय-हाय, जब बिटिन यू फेसबुक आई...
गौचर। मेले की तीसरी संध्या में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सुरेश अलबेला, सुरेश सोनी ऊर्फ भोला और उपासना सेमवाल आदि ने कविताओं के जरिए सरकारी दफ्तरों में घूसखोरी, समाज में फैली कुरीतियों व अंधविश्वास पर अपनी कविताओं के माध्यम से प्रहार किया। तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित उपासना सेमवाल ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देती कविता ‘बेटी बिरणी बणाई किले..., सोशल मीडिया पर इंगित कविता फेसबुक कू रोग..., संगति मचि हाय-हाय, जब बिटिन यू फेसबुक आई... व पलायन पर व्यंगात्मक कविता नकली जन्म पत्री... के माध्यम से सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर तंज कसा।
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