मां नंदा की डोली व लोकजात यात्रा वेदनी में पूजा-अर्चना के बाद देर शाम गांव बांक पहुंची। वेदनी कुंड में दूरदराज से पहुंचे लोगों ने अपने पित्रों को तर्पण दिया। वहीं महेश मर्दिनी मंदिर में कुनियाल ब्रहामणों ने पूजा अर्चना की।
शनिवार की सुबह मां नंदा की डोली गैरोली पातल से आठ बजे वेदनी पहुंची। डोली के वेदनी पहुंचने पर संपूर्ण क्षेत्र नंदामय हो गया। वाण के ग्रामीणों ने डोली को वेदनी पहुंचाया। कुरूड़ के गौड़ ब्रहामणों ने देवी की पूजा कर श्रद्धालुओं को प्रसाद दिया। महेशमर्दिनी मंदिर के पंडित कुनियाल ब्रहामण उमेश कुनियाल, रमेश कुनियाल आदि ने गौरी शंकर की पूजा की।
श्रद्धलुओं ने मां नंदा को ब्रह्म कमल पुष्प अर्पित किए। श्रद्धालु अपने घरों को प्रसाद के रूप में ब्रह्म कमल पुष्प लाए। लोकजात यात्रा के साथ क्षेत्र के कई गांव की छतोली भी शामिल रही।
देर शाम डोली गांव बांक पहुंची। वहीं मां नंदा का धर्म भाई लाटू देवता व निशान वाण गांव पहुंचा। यात्रा के मुख्य पुजारी व कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने बताया कि वेदनी में सप्तमी की जात के बाद यात्रा वापस हो गई है। 10 सितंबर को डोली देवराड़ा मंदिर के स्वर्ण सिंहासन के गर्भ गृह में छह माह विराजमान होगी।
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लोकजात यात्रा का वापसी का कार्यक्रम
चार सितंबर कोल्वाणी, पांच को उलंग्रा, छह को कोबेराधार, सात को गोठिंडा, आठ को कोकुराड़, नौ को ढुंगातोली व दस सितंबर को ढ़ुंगातोली से गांव भेटा होते देवराड़ा मंदिर में छह माह प्रवास पर रहेंगी।