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Chamoli News: जागर और मांगल गीतों से गुंजायमान हुआ ल्वाणी

Tue, 19 Sep 2023 05:44 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
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ल्वाणी में आयोजित मेले के प्रतिभागी।
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राज राजेश्वरी संस्कृति संरक्षण मेला का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ आगाज
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विधायक भूपालराम टम्टा ने मेले के लिए दो लाख रुपये देने की घोषणा की
फोटो
देवाल। ल्वाणी में मंगलवार से राजराजेश्वरी संस्कृति संरक्षण मेले का आगाज हो गया। मेले में लोकगायक दीपा नगरकोटी, विवेक नौटियाल, कुंदन बिष्ट, बबीता, ममंद समेत विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान जागर और मांगल गीतों से पूरा क्षेत्र नंदामय हो गया।
मेले का उद्घाटन विधायक भूपालराम टम्टा ने किया। उन्होंने मेले के संचालन के लिए दो लाख और जीआईसी ल्वाणी के लिए फर्नीचर देने की घोषणा की। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ नंदा के जागर से हुआ। लोकगायक कुंदन ने हीटाे रे हीटो मेला लागी रे पिलखड़ा मंदिर..., हे नंदा हे गौरा कैलाश की जात्रा..., विवेक के तू रेंदी मां ऊंचा कैलाश..., दीपा नगरकोटी मोतिमा जी रये मोतिमा..., दैणा होया खोली का गणेशा दैणा होया मोहरी..., बवीता की हुड़की घमा-घम व खटीमा की मां नैना देवी सांस्कृतिक दल, वनसेस म्यूजीकल ग्रुप देहरादून, ममंद वाण, ल्वाणी ने रंगारंग लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। इस मौके पर मेलाध्यक्ष महाबीर बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, कृष्णा बिष्ट, देवी जोशी, डॉ. कृपाल भंडारी, इंद्रसिंह राणा, उमेश मिश्रा, नरेंद्र बिष्ट, नंदी कुनियाल आदि मौजूद थे।
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मुंदोली गांव पहुंची नंदा की डोली व लोकजात यात्रा

देवाल। फल्दियागांव से रवाना हुई लोकजात यात्रा मंगलवार को मुंदाेली गांव पहुंची जहां श्रद्धालुओं ने डाेली और यात्रा का भव्य स्वागत किया। ग्रामीणों ने मां नंदा के स्वागत में मांगल गीत गाए। महिलाओं ने डोली को चूड़ी, बिंदी, सिंदूर भेंट किया। श्रद्धालुओं ने मां नंदा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। बुधवार को डोली वाण गांव में प्रवास करेगी। वाण में भी दो दिवसीय लोकउत्सव सेलपाती का आयोजन होगा। 22 सितंबर की सुबह वेदनी में लोकजात यात्रा का समापन होगा। संवाद
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ससुराल से मायके पनाईसेरा मंदिर पहुंची कालिंका देवी की डोली
गौचर। मंगलवार को क्षेत्र के सात गांवों की ईष्ट देवी मां कालिंका देवी अपने ससुराल भट्टनगर गांव के कालिंका मंदिर से हवाई पट्टी स्थित अपने मायके पनाईसेरा मंदिर पहुंचीं। इस दौरान देवी भक्तों ने ढोल नगाड़ों और पुष्प वर्षा से देवी का भव्य स्वागत किया। हर साल भाद्रमाष की अष्टमी को कालिंका देवी अपने भाई रावलनगर के लाटू देवता की अगुवाई में मायके आती हैं। तीन दिनों तक मायके में रहते हुए देवी भक्त भजन-कीर्तन, पूजा, रात्रि जागरण और भंडारे का आयोजन करते हैं। 22 सितंबर को देवी अपने भाई रावलनगर के लाटू देवता की अगुवाई में फिर से ससुराल के लिए विदा हो जाएंगी। संवाद

ल्वाणी में आयोजित मेले के प्रतिभागी।

ल्वाणी में आयोजित मेले के प्रतिभागी।

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